10 Tips for Examination : जानें, परीक्षा के Fear को Easily कैसे दूर करें
Examination Tips: Know how to easily overcome the fear of examination

Examination : हिन्दी के मात्रा तीन अक्षरों द्वारा निर्मित शब्द है ’परीक्षा‘। इस शब्द (Examination) का मुंह से नाम आते ही अचानक छात्रों के माथे से पसीने छूटने लगते हैं और इसी के नाम का जिक्र सुनते ही बड़े-बड़े प्रतियोगी कांपने लगते है जबकि यह एक सच्चाई है कि परीक्षा के बिना किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति की योग्यता का सटीक आंकलन नहीं किया जा सकता। जीवन में उन्नति की राह में अग्रसर होना भी कठिन हो जाता है।
परीक्षाओं का वस्तुतः आज के बदलते दौर में कदम-दर-कदम कड़ा सामना करना ही पड़ता है। जिस प्रकार सोने की कसौटी पर परखने हेतु तथा शुद्ध करने के लिए आग में तपाया जाता है कि उसी तरह छात्रों की योग्यता की कसौटी को जांचने के लिए परीक्षा का आयोजन भली-भांति किया जाता है।
प्राचीन काल में परीक्षाएं (Examination)
ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इसी युग में दिखाई दे रहा है बल्कि प्राचीन काल में भी गुरू अक्सर अपने शिष्यों की समय-समय पर परीक्षाएं लेते रहे हैं क्योंकि यदि जीवन में परीक्षा शब्द ही नहीं होगा तो छात्रा के गुण-दोषों का सही मूल्यांकन करना बड़ी टेढ़ी खीर हो जाएगा, इसलिए परीक्षा का होना अति आवश्यक है।
परीक्षा (Examination) के बगैर शिक्षा
वैसे भी परीक्षा शिक्षा की कसौटी है। परीक्षा के बगैर शिक्षा का कोई अस्तित्व नहीं होता, इसलिए परीक्षा के नजदीक आते ही मन में भय न पालें, ध्यान लगाकर पढ़ें। अवश्य ही समस्या का समाधान खुद ब खुद हो जाएगा। इस बारे में शिक्षा शास्त्राी तथा परीक्षा काउंसलरों की राय है कि छात्रों के परीक्षण के लिए परीक्षा परम आवश्यक है।
परीक्षा (Examination) से भयभीत क्यों?
यद्यपि सभी के जीवन में परीक्षा का क्षण एक बार अवश्य आता है, परंतु छात्रों को परीक्षा से कई बार दो चार होना पड़ता है। यदि जब कोई चीज अनिवार्य है, तो फिर उससे भयभीत क्यों होना? फिर तो डटकर सामना करना चाहिए। इससे ही उनकी बुद्धि, प्रतिभा, स्मरण शक्ति, परिश्रम, लेखनशक्ति का सही मायनों में मूल्यांकन होता है।

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परीक्षा (Examination) के परिणाम
निस्संदेह, परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही छात्रों के भविष्य की दिशा निर्धारित होती है। इसीलिए प्रत्येक छात्रा का प्रयास होता है कि वह परीक्षा में अन्य छात्रों से बेहतर प्रदर्शन करें पर कई बार ऐसा करते समय छात्रा तनावग्रस्त तक हो जाते हैं। इसलिए उन्हें प्लानिंग के साथ तैयारी करने की बेहद जरूरत होती है। तभी वे सफलता की ऊंचाइयों को स्पर्श करने में सफल हो सकते हैं।
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परीक्षा (Examination) का भूत चढ़ना
हालांकि परीक्षा के दिन उन्हीं छात्रों के लिए परेशानीदायक सिद्ध होते है जो पूरे साल मौज-मस्ती में खोये रहते हैं या फिर अपना सारा का सारा बेशकीमती समय टी वी देखने और खेल-कूद में व्यतीत कर देते हैं। हकीकत में ऐसे छात्रों पर परीक्षा का भूत चढ़ना स्वाभाविक है। इस बीच विषय अधिक होते हैं, समय अल्प। अतः छात्रा घबरा जाते हैं और चेहरे से पसीना छूटने लगता है। फलस्वरूप छात्रा बीमार हो जाते हैं या फिर अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं।

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हर एक विषय पर गहनतापूर्वक ध्यान
परिणामस्वरूप अंत में कुछ याद नहीं होते देख शार्ट कट अपनाने के साथ-साथ अनैतिक तरीकों से अर्थांत नकल द्वारा उत्तीर्ण होने का ख्वाब देखने लगते हैं जिसका परिणाम अंततः बुरा ही साबित होता है। हमें बोर्ड परीक्षाएं निकट आते ही समय सारिणी को तैयार करके हर एक विषय पर गहनतापूर्वक ध्यान देना चाहिए।
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यही नहीं, छात्रों को वर्ष भर नियमित ढंग से अध्ययन करना चाहिए और परीक्षा को एक मुसीबत न समझकर, अपनी योग्यता की जांच का सुनहरा अवसर मानकर इस चुनौती का कड़ा सामना डटकर करना चाहिए। तभी ऐसे में छात्रों को अपना भविष्य उज्जवल होता दिखाई देगा जो उनके भविष्य को नया आयाम देता नजर आयेगा।
परीक्षा (Examination) के डर का क्या कारण है?
परीक्षा का डर कई कारणों से होता है, जैसे
● परीक्षा में ख़राब प्रदर्शन का डर
● माता-पिता और शिक्षकों को नीचा दिखाने का डर
● कठिन माने जाने वाले कुछ विषयों से डर लगता है
● पढ़ाई करते समय याद रखने या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता
● ग्रेड को महत्व देना और उन्हें आत्म-सम्मान की छाप के रूप में उपयोग करना
● परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान नकारात्मक आत्म-चर्चा
● अपने लिए एक उच्च मानक स्थापित करना
● अपनी तुलना दूसरों से करना
परीक्षा भय के कारण अक्सर शैक्षणिक प्रदर्शन ख़राब हो जाता है, जिससे छात्रों में चिंता और अवसाद बढ़ जाता है। यह उनके समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और आत्मसम्मान को कम करता है।
छात्र परीक्षा के डर पर काबू पा सकते हैं, लेकिन उन्हें नियमित रूप से माता-पिता और शिक्षकों से बहुत अधिक मार्गदर्शन, भावनात्मक समर्थन और सकारात्मक सुदृढीकरण की आवश्यकता होती है। अपने बड़ों की मदद और अपनी सोच में बदलाव से ही छात्र परीक्षा के डर से छुटकारा पा सकते हैं।
परीक्षा (Examination) की तैयारी कैसे करें
1. प्रारंभिक संशोधन
शीघ्र पुनरीक्षण आपको समय से पहले परीक्षा के लिए पढ़ाई पूरी करने में मदद करेगा। आपके पास पाठ्यक्रम से प्रत्येक विषय को दोहराने के लिए पर्याप्त समय होगा। इस तरह आपका कोई भी विषय नहीं छूटेगा और आप अपनी परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार रहेंगे।
2.अपनी समय सारिणी बनाएं
हर छात्र का पढ़ाई का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए, यह आपकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार आपकी समय सारिणी बनाने में मदद करता है। इस बात का ध्यान रखें कि आप कितने समय तक एक जगह बैठ सकते हैं और बिना विचलित हुए ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। समय सारिणी निर्धारित करें और उसके अनुसार अध्ययन करें और आप देखेंगे कि आपकी चिंता का स्तर काफी कम हो गया है।
3. एक योजना तैयार रखें:
अपनी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक योजना बनाएं, जिसके आधार पर यह पता लगाया जाए कि किन विषयों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है और कौन से विषय आपको अच्छे से आते हैं। रिवीजन करते समय फ्लैशकार्ड, फ्लो चार्ट, ग्राफ और चित्र बनाएं और फिर अपनी परीक्षा से पहले आखिरी मिनट में रिवीजन के लिए इनका उपयोग करें।
4. मिश्रित विषय
सभी विषयों पर बराबर ध्यान दें. प्रत्येक विषय को दोहराने के लिए एक विशिष्ट समय आवंटित करें, चाहे वह कितना भी कठिन या आसान क्यों न हो। इस तरह आपने बिना कोई छूटे सभी विषयों का रिवीजन कर लिया होगा।
यदि आपको किसी विशेष विषय में कोई कठिनाई है तो अपने शिक्षकों या माता-पिता से अपनी शंकाओं का समाधान कर लें। कठिन लगने वाले विषयों से बचने से केवल उस विशेष परीक्षा का डर पैदा होगा और उस पेपर में खराब प्रदर्शन होगा।

5. नोट्स तैयार करें
किसी विषय का अध्ययन करते समय या किसी अध्याय को दोहराते समय, महत्वपूर्ण बिंदुओं, जैसे तारीखें, घटनाएँ, लोग, घटनाएँ आदि के नोट्स बना लें। उन्हें समृद्ध और प्रभावशाली बनाने के लिए उत्तर लिखते समय इनका उपयोग करें।
6. ब्रेक लें
जब आप अपने पुनरीक्षण के लिए एक समय सारिणी बनाते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप बीच-बीच में ब्रेक आवंटित करते हैं। लंबे समय तक पढ़ाई करना दिमाग और शरीर के लिए कठिन होता है। इससे ध्यान भटकता है और ध्यान भटकता है।
हर एक या दो घंटे में ब्रेक लें और उस समय को कुछ ऐसा करने में बिताएं जो आपको पसंद हो, जैसे कोई शौक, जैसे गाना, नृत्य करना, पेंटिंग करना, या सिर्फ अपने माता-पिता या दोस्तों से बात करना। इससे दिमाग तरोताजा हो जाता है और आपकी एकाग्रता और ऊर्जा के स्तर में सुधार होता है।
7. अच्छी नींद लें (Examination)
स्वस्थ मन और शरीर के लिए रात की अच्छी नींद आवश्यक है। सुनिश्चित करें कि आपको हर रात 8 घंटे की निर्बाध नींद मिले। आधी रात का तेल मत जलाओ! इसके बजाय, जल्दी सोएं और जल्दी उठें ताकि आप सुबह तरोताजा दिमाग के साथ पढ़ाई के लिए बैठ सकें।
8. अपनी लिखावट बनाए रखें
एक अच्छी लिखावट आपके अच्छे अंक प्राप्त करने की संभावनाओं को बेहतर बनाती है। छात्र समय पर अपना पेपर ख़त्म करने की कोशिश में अपने लेखन को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। परीक्षा से पहले मॉक टेस्ट हल करने से आपको पर्याप्त लेखन अभ्यास और स्पष्ट रूप से लिखने का अभ्यास करने का मौका मिलेगा। यह आपकी लेखन गति को बढ़ाकर आपको समय पर परीक्षा पूरी करने का अभ्यास करने में मदद करेगा।

9. अपने प्रदर्शन की तुलना दूसरों से करने से बचें
हमेशा याद रखें कि प्रत्येक छात्र अद्वितीय है। उनकी क्षमताएं अलग-अलग हैं और परीक्षाओं में उनका प्रदर्शन भी अलग-अलग होगा। माता-पिता को यह याद रखना चाहिए कि वे अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करने से बचें, क्योंकि दोनों में हमेशा अंतर रहेगा।
छात्रों को भी अपने प्रदर्शन की तुलना अपने दोस्तों से करने से बचना चाहिए और अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे छात्रों में चिंता कम होगी और उन्हें शांत मन से परीक्षा देने में मदद मिलेगी।
10. शीर्षक और उपशीर्षक शामिल करें
उत्तर देते समय शीर्षकों एवं उपशीर्षकों का प्रयोग करें। इससे परीक्षक को यह समझने में मदद मिलती है कि आपने क्या और कैसे उत्तर दिया है। लंबे-लंबे पैराग्राफ लिखने के बजाय छोटे-छोटे पैराग्राफ बनाएं। इससे आपका लेखन साफ-सुथरा दिखता है। यह आपके परीक्षक पर अच्छा प्रभाव छोड़ेगा और आपके अच्छे अंक प्राप्त करने की संभावना बढ़ा देगा।



