Knowledge Tips : क्या आप जानते हैं किस सुल्तान की सनक ने दिल्ली को उजाड़ दिया था
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Knowledge Tips : हिन्दुस्तान के प्राचीन इतिहास (ancient history of india) का यदि अध्ययन किया जाए तो हमारा इतिहास अनेक अविस्मरणीय घटनाओं से भरा पड़ा है। इन्हीें घटनाओं में एक बहुत ही रोचक प्रसंग दिल्ली के सुल्तान तुगलक के काल का मिलता है, जब उसने सन् 1326 ई. में दिल्ली से अपनी राजधानी उठा कर दौलताबाद (देवगिरी) ले जाने का प्रयास किया था।
अनाथ हो गई थीं दिल्ली की गलियां (Knowledge Tips)
कुछ समय के लिए तो दिल्ली की गलियां पूर्णतः सुनसान, वीरान और अनाथ हो गई थीं। प्रसिद्ध इतिहासकार बर्नी ने उस समय का विवरण इन शब्दों में लिखा है, ‘दिल्ली नगर के मकानों और राजमहलों में एक कुत्ता और बिल्ली तक नहीं रह गई थी। दिल्ली नगर की छतों से जब एक दिन शाम के समय अग्नि, धुएं और प्रकाश का चिन्ह भी दिखाई नहीं पड़ा तो सुल्तान की आत्मा को संतोष हुआ और उसे चैन पड़ा।‘
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सुल्तान मुहम्मद तुगलक की ख्वाहिश (Knowledge Tips)
सुल्तान मुहम्मद तुगलक (Sultan Muhammad Tughlaq) की यह ख्वाहिश थी कि नई राजधानी दौलताबाद में विद्वानों, कर्मचारियों, दिल्ली के सभी नागरिकों एवं व्यापारियों को ले जाया जाए किंतु दिल्ली निवासियों ने भावनावश अतीत की स्मृतियों से जुड़े अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ने में आनाकानी करनी आरंभ कर दी, जिससे मुहम्मद तुगलक का क्रोध चरम सीमा पर पहुंच गया।
उसने सैनिकों को आज्ञा दी कि दिल्ली के सभी लोगों को उनके सामान के साथ दौलताबाद ले जाया जाए और इंकार करने वाले को मौत के घाट उतार दिया जाए। विवश होकर लोगों को दौलताबाद के लिए प्रस्थान करना पडा, किंतु सुल्तान की सनक के कारण भयानक स्थिति उत्पन्न हो गई।
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दिल्ली का सौंदर्य भी अनेक वर्षों के लिए नष्ट हो गया
कुछ लोग तो दिल्ली से दौलताबाद का 700 मील लंबा सफर करते हुए चल बसे, कुछ ने वहां पहुंच कर दम तोड़ दिया। शेष वहां पहुंचने वालों की स्थिति दयनीय हो गई। दिल्ली का सौंदर्य भी अनेक वर्षों के लिए नष्ट हो गया। ‘मूर‘ का एक-एक यात्री आबू अब्दुल मुहम्मद, जो मुहम्मद तुगलक के जमाने में भारत भ्रमण को आया था, उसने दिल्ली की उस समय की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अपने संस्मरण में लिखा, ‘वह नगर (दिल्ली) रेगिस्तान के रूप में बदल गया था।’

सुल्तान की सनक (Knowledge Tips)
सुल्तान की इस सनक का आश्चर्यजनक पहलू तो यह है कि राजधानी बदलने पर भी वह स्वयं दिल्ली में ही रहता था। अपनी भूल का अहसास होने पर सुल्तान अपनी राजधानी पुनः दिल्ली ले आया। इससे मुहम्मद तुगलक को बहुत नुक्सान उठाना पडा। वह कर्मचारी और शासक, जिन्हें सुल्तान ने नई राजधानी में छोड़ा था, उसके विरूद्ध षड्यंत्र करने लगे। मदुरा में सैयद अहसान, बीदर में नुसरत खां और दौलताबाद में मालिक होशांग के विद्रोह से केवल पश्चिम-दक्षिण ही तुगलक शासन का अंग रह गया।
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दिल्ली की सल्तनत (Knowledge Tips)
सुल्तान मुहम्मद तुगलक की राजधानी बदलने की सनक के साथ ही उसका पतन आरंभ हो गया। उसके बारे में यह भी कहा जाता है कि मुहम्मद तुगलक (मुहम्मद बिन तुगलक) ने अपने पिता ग्यासुद्दीन तुगलक और अपने छोटे भाई का वध कर दिल्ली की सल्तनत हथिया ली थी।
ग्यासुद्दीन की हत्या की योजना (Knowledge Tips)
मूर यात्री आबू मुहम्मद अब्दुल ने अपने संस्मरण में लिखा है कि 1325 ई. में ग्यासुदीन बंगाल और तिरहुत के युद्ध से लौट रहा था तो मुहम्मद तुगलक व उसके सहायक शेख निजामुद्दीन औलिया ने ग्यासुद्दीन की हत्या की योजना बनाई जिसके अन्तर्गत उन्होंने दिल्ली से छः मील दूर अफगानपुर में एक ऐसा लकड़ी का महल बनवाया था कि सुल्तान के उसमें ठहरते ही वह धराशायी हो गया तथा ग्यासुद्दीन अपने पुत्र सहित वहीं दब कर मर गया।
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सुल्तान ग्यासुदीन ने कुतुब से चार मील दूर ‘तुगलकाबाद‘ नामक विशाल तथा दृढ़ दुर्ग बनवाया था। ग्यासुदीन व उसके पुत्रा के शव को तुगलकाबाद के मकबरे में दफनाया गया। 20 मार्च 1351 को यह सनकी सुल्तान हमेशा के लिए मौत के आगोश में सो गया।



