Best Health Tips : जानें कौन सी सब्जी है अनके बीमारियों की अचूक औषधि
Best Health Tips: Know which vegetable is the perfect medicine for many diseases

Best Health Tips : पत्तागोभी मात्रा सब्जी ही नहीं है, अपितु इसमें औषधीय गुण भी विपुल मात्रा में हैं। पत्ता गोभी के प्रयोग से जोड़ों की पीड़ा, मस्तिष्क की निर्बलता, दंतरोग, रक्तविकार, ज्ञान तंतुओं के रोग, अजीर्ण, पाण्डुरोग, आंखों की निर्बलता, और शारीरिक स्थूलता निवारण में बड़ा लाभ होता है। इसके प्रयोग से जठर के उपदंश व स्वप्नदोष की घातक बीमारी भी दूर हो जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार पत्तागोभी मधुर, वृष्य, तीखी, कड़वी, शीतल, पाचक, लघु, अग्निदीपक और कुछ अंश में वातकारक भी होती है। यह कफ, पित्त, कुष्ठ, खांसी, रक्तदोष आदि में भी उपयोगी है। पत्तागोभी में विटामिन ‘सी‘ की मात्रा विशेष होने से उसका अधिक महत्त्व है। एक कप कच्चे गोभी के रस में दैनिक आवश्यकता के तीसरे हिस्से का विटामिन ‘सी‘ प्राप्त हो जाता है।
हरे पत्तों में विटामिन ‘ए‘ होता है (Best Health Tips)
पत्तागोभी के बाहरी हरे पत्तों में विटामिन ‘ए‘ होता है, इस लिए पत्तागोभी के बाहरी पत्तों को नहीं फेंकना चाहिए। इन हरे पत्तों में लौह तत्व की मात्रा भी अधिक होती है। गोभी को जिस पानी में पकाया गया हो, उस पानी को भी नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि उसमें प्रजीवक (विटामिन) ‘सी‘, कैल्शियम, लौह, फाॅस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे अनेक पोषक तत्व होते हैं।
गोभी के रस का अतिशय मात्रा में सेवन करना भी हितकर नहीं होता क्योंकि इससे थायरायड ग्रंथि का स्राव अधिक मात्रा में होने की संभावना है। गोभी में प्राप्त लौह तत्व शरीर में तुरंत शोषित होकर घुल मिल जाता है। इसी कारण पत्ते गोभी के रस को पाण्डुरोग में भी अत्यन्त उपयोगी पाया गया है। एक कप की मात्रा में नियमित रूप से रस लेते रहने से पाण्डुरोग की बीमारी शीघ्र ही दूर हो जाती है।

पत्ता गोभी के रस के फायदे (Best Health Tips)
पेट में जलन, दर्द, खट्टी डकारों का आना, कभी-कभी उल्टी का आना आदि भी जठर के उपदंश के लक्षण होते हैं। इन लक्षणों के होने पर प्रतिदिन 450 मि. ली. तक थोड़ा-थोड़ा करके प्रतिदिन पत्ता गोभी के रस को लेते रहने से फायदा होता है। पाचक रसों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के अत्यधिक स्राव के कारण अन्तस्त्वचा का क्षय होने से आंतों के उपदंश (घाव) हो जाते हैं। इस अतिस्राव का कारण अधिकतर मानसिक तनाव या संताप होता है।
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आंतों के उपदंश भरने में गोभी का रस अकसीर सिद्ध हुआ है, इसलिए प्रतिदिन लगभग 400-500 मि. ली. पत्ता गोभी का रस पीना हितकर होता है। इसके बाद ककड़ी, पपीता और आलू का रस भी पिया जा सकता है। खट्टे फलों का रस सेवन करना अहितकर होता है।
पत्ता गोभी के रस के नियमित सेवन से जोड़ों की पीड़ा, आंखों की निर्बलता, शारीरिक मोटापा, दन्तरोग, मस्तिष्क की निर्बलता, रक्तविकार तथा ज्ञानतंतुओं के रोगों के साथ ही अजीर्ण एवं पाण्डुरोग की व्याधि भी नष्ट होती है।
सब्जियों से ज्यादा उसके पत्ते होते हैं पौष्टिक (Best Health Tips)
यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि जो फ़ल व सब्जियाँ हम खाते हैं, उनके पत्तों एवं जड़ों का उपयोग भी सब्जी बनाने में कर सकते हैं। ये पत्ते उन सब्जियों से ज्यादा पौष्टिक होते हैं जो बीमारी से बचाने या रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफ़ी मददगार रहते हैं।
इसी प्रकार कमल के फ़ूल के डंडे, गुलमोहर फ़ूल व उसके पत्ते, पान के पत्ते. मटर के छिलके, खरबूजे व तरबूज के ऊपर का छिलका, पालक के डंठल छोड़ के छिलके व पत्ते, सहजन के पत्ते को भी सब्जी की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
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शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका
हरा धनिया, पालक, पोदीना, मीठा नीम के डंठल को तो अधिकतर घरों में फ़ेंक दिया जाता है। ये भी उतने ही पौष्टिक हैं जितने कि उनकी पत्तियाँ। हरी पत्तेदार सब्जियों में कैलोरी तो बहुत कम होती है। प्रायः 100 ग्रा. में 25.30 कैलोरी (नमी) पानी 80-90 प्रतिशतए वसा 0.3-0.6 ग्रा. ही रहती है लेकिन विभिन्न सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्र में उपस्थित रहते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने व रोगों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ज्यादा पकाने से नष्ट हो जाते हैं पोषक तत्व (Health Tips)
हरी सब्जियों में उपलब्ध सूक्ष्म पोषक तत्व ज्यादा पकाने से या उबालने से नष्ट हो जाते हैं अतः इन सब्जियों का उपयोग ज्यादातर जूसए सलाद के रूप में करें। ज्यादा पकाने के बाद भी दूसरी सब्जियों से हरे पत्तेदार सब्जियों में ज्यादा सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं।

Green Leafy Vegetables पौष्टिक तत्वों से भरपूर
सभी पत्तेदार सब्जियों को बेसन, दाल, कटलेट, खमण, इडली, ढोकला, बाटी, बेसन के गट्टे, सांभर, खिचड़ी या सैंडविच के मसाले में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। इसके कारण वह ज्यादा स्वादिष्ट भी बनेगी। हरी पत्तेदार सब्जियाँ पौष्टिक तत्वों (Nutrient Elements Vegetables) से इतनी भरपूर होती हैं कि इनकी बहुत अधिक मात्र में आवश्यकता नहीं होती।
दिनभर में 1 कटोरी हरे पत्तेदार सब्जी वयस्क व्यक्ति के लिए पर्याप्त है। तो फि़र अब देर किस बात की। जो पत्तेदार सब्जियाँ हम फ़ेंक रहे हैं, आज से ही उन्हें आहार में शामिल कर लिया जाए। कुछ ही दिनों में इसका असर आपके चेहरे, स्वास्थ्य पर अवश्य दिखेगा साथ ही बीमारी में भी त्वचा कांतिमय होने लगेगी।
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गुणकारी है टमाटर
सेब, नाशपाती, संतरा, अंगूर, खरबूजा और चुकंदर आदि में जितना लौह तत्व होता है, उससे कहीं अधिक टमाटर में पाया जाता है। इसी तरह प्याज, गाजर, मूली, शलजम, गोभी तथा केले में जितना लोहा होता है उससे आधे से अधिक लौह टमाटर में पाया जाता है। पोटाश की दृष्टि से अधिकांश फलों और कितनी ही सब्जियों से टमाटर श्रेष्ठ की गिनती में आता है।

टमाटर में कुछ अद्भुत और विशेष गुण (Special properties in tomato)
टमाटर में कुछ अद्भुत और विशेष गुण हैं। वह खून को साफ करता है और दांतों को सुदृढ़ और मजबूत बनाता है। यह सूखा रोग की भी दवा है। इसके इस्तेमाल से बच्चे इस घातक रोग से बचे रहते हैं और स्वस्थ रहते हैं। स्नायुओं के लिए टमाटर रसायन का कार्य करता है। यह हृदय की दुर्बलता में भी बड़ा हितकारी है। टमाटर भूख को बढ़ाता है, पाचन शक्ति ठीक करता है तथा विजातीय द्रव्य निकाल कर शरीर को शुद्धि प्रदान करना है।
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मधुमेह में टमाटर बहुत ही गुणकारी (Tomatoes in Diabetes)
मधुमेह के रोगियों को जिन्हें डाक्टर कभी-कभी फलों के सेवन पर रोक लगा देते हैं, उनके लिये टमाटर बहुत ही गुणकारी सिद्ध हुआ है। ताजे फलों के सेवन पर पूर्ण रूप से रोक लगा देने पर मधुमेह के रोगी को प्राकृतिक रूप में प्राप्त होने वाले खनिज लवणों से वंचित रहना पड़ता है, जिसकी वजह से उसे मिलने वाले पोषक तत्वों के अभाव से शारीरिक और मानसिक रूप से पीड़ित रहना पड़ता है लेकिन खनिज लवणों से भरपूर टमाटर का सेवन रोगी की इस कमी को पूरी करता है और खट्टा होने की वजह से वह शर्करा की मात्रा भी घटाता है।
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बुखार की गर्मी को तो शांत करता है टमाटर का रस (Health Tips)
बुखार की हालत में टमाटर का रस बुखार की गर्मी को तो शांत करता है साथ ही साथ रोगी की प्यास भी बुझाता है। ऐसे बहुत से अवसरों पर जब उपवास रखना पड़ता है तब टमाटर का रस पानी में मिलाकर लेने से उपवास का लाभ और भी बढ़ता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि टमाटर विटामिनों से भरपूर एक सस्ता और सुलभ फल हैं इसमें विटामिन ए भी होता है जो मुख्यतः चिकनाई वाले पदार्थ जैसे दूध, घी मक्का आदि से मिलता है। (स्वास्थ्य दर्पण)



