Stomach Care : पेट की गड़बड़ियों से बचाएंगी ये 14 बातें, Truthful Tips

Stomach Care: These 14 things will save you from stomach problems, Truthful Tips

Stomach Care: These 14 things will save you from stomach problems, Truthful Tips
Stomach Care: These 14 things will save you from stomach problems, Truthful Tips

Stomach Care : हमारे स्वास्थ्य का केंद्र हमारा पेट होता है, अच्छी सेहत के लिए अच्छे पाचन तंत्र (Stomach Health) का होना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। जो भोजन हमारा शरीर पचा नहीं पाता वह शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाए नुकसान पहुंचाता है। पेट की गड़़बडिय़ों का असर अन्यय तंत्रों पर ही नहीं अंगों पर भी पड़ता है इसमें हमारा हृदय, मस्तिष्क, इम्यून सिस्टम, त्वचा, भार, शरीर में हार्मोनों का स्तर आदि सम्मिलित हैं। पेट की गड़बडिय़ों के कारण पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होने से लेकर कैंसर विकसित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

पेट की प्रमुख बीमारियां (Stomach Diseases)

जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता तो खाने को उस रूप में परिवर्तित नहीं कर पाता जिस रूप में शरीर उसे ग्रहण कर सके। कमजोर पाचन तंत्र से शरीर का इम्यू न सिस्टीम गड़बड़ा जाता है और शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए ऐसे लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं।

कब्ज (Constipation-Stomach Care Tips)

कब्ज यानी बड़ी आंत से शरीर के बाहर मल निकालने में कठिनाई आना। यह समस्य गंभीर होकर बड़ी आंत को अवरूद्ध कर जीवन के लिए घातक हो सकती है। कब्जा एक लक्षण है जिसके कईं कारण हो सकते हैं जैसे खानपान की गलत आदतें, हार्मोन संबंधी गड़बडिय़ां, कुछ दवाईयों के साइड इफेक्ट आदि। इसलिए इसके प्रभावकारी उपचार के लिए जरूरी है कि सबसे पहले हम इसके कारणों का पता लगाएं। एक अनुमान के अनुसार महानगरों में आरामतलबी की जिंदगी बिताने के कारण करीब 30 प्रतिशत लोगों का पेट साफ नहीं रहता। अगर लगातार तीन महीने तक कब्ज की समस्या बनी रहे तो इसे इरीटेबल बॉउल सिंड्रोम (आईबीएस) कहते हैं।

गैस की समस्या (Gas Problem-Stomach Care)

भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना गैस बनने का प्रमुख कारण है। कई लोगों के पाचन मार्ग में गैस जमा हो जाती है, कुछ लोगों को दिन में कईं ऐसा बार होता है। उम्र बढऩे के साथ शरीर में एंजाइम का स्तकर कम हो जाता है इस कारण गैस की समस्यौ ज्याकदा बढ़ जाती है। लंबे समय तक रहने वाली गैस की समस्याा अल्ससर में बदल सकती है। जिनकी पाचन शक्ति अक्सेर खराब रहती है और जो प्राय: कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है।

गैस्ट्रो इसोफैगल रिफ्लक्सक डिसीज (Gastro Esophageal reflux disease)

पेट की अंदरूनी पर्त भोजन को पचाने के लिए कई पाचक उत्पााद बनाती है, जिसमें से एक स्टभमक एसिड है। कई लोगों में लोवर इसोफैगियल स्फिं क्टार (एलईएस) ठीक से बंद नहीं होता और अक्सर खुला रह जाता है। जिससे पेट का एसिड बहकर वापस इसोफैगस में चला जाता है। इससे छाती में दर्द और तेज जलन होती है। इसे ही जीईआरडी या एसिड रिफ्लक्स कहते हैं। आम बोलचाल की भाषा में इसे एसिडिटी कहा जाता है। कईं लोग पेट में सामान्य से अधिक मात्रा में एसिड स्त्रावित होने की समस्या से पीडि़त होते हैं जिसे जोलिंगर एलिसन सिंड्रोम कहते हैं।

Stomach Care: These 14 things will save you from stomach problems, Truthful Tips
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गैस्ट्रोएंट्राइटिस (Gastroenteritis-Stomach Care)

गैस्ट्रोएंट्राइटिस या आंत्रशोध आमतौर पर बैक्टीरिया और वाइरस का संक्रमण है। इसके कारण पेट की अंदरूनी परत में जलन होती है और वो सूज जाती है। संक्रमित व्यक्तिको दस्त और उल्टी होने लगती है। यह संक्रमण ऐसे भोजन या पानी के सेवन से होता है जो ई। कोलाई, सालमोनेला, एच। पाइलोरी, नोरो वाइरस, रोटा वाइरस आदि से संक्रमित होता है। इसे स्टमक फ्लु भी कहा जाता है। सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति बिना किसी स्वास्थ्य जटिलता के कुछ ही दिनों में इससे ठीक हो जाता है। लेकिन बच्चे, बुजूर्ग और ऐसे व्यस्क जिनका इम्यून तंत्र कमजोर होता है गैसेट्रोएंट्राइटिस उनके लिए घातक हो सकता है।

पेट फूलना (Stomach Care Tips)

पेट गैस या बड़ी आंत के कैंसर या हार्निया के कारण भी फूल सकता है। ज्याफदा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है इससे भी पेट फूल जाता है और बेचौनी होती है। किसी अंग का आकार बढऩे से भी पेट फूल सकता है।

कोलाइटिस (Stomach Care Tips)

कोलाइटिस में बड़ी या छोटी आंत में छाले पड़ जाते हैं और कुछ भी खाने पर जलन होती है। इस जलन को शांत करने के लिए और खाना खाना या बार-बार ठंडा पानी पीना पड़ता है। कभी-कभी अल्सर के छाले फट जाते हैं, जिससे मल के साथ रक्त निकलता है। छाले फटने से कभी-कभी क्लॉट बन जाते हैं, इससे मल में बहुत तेज दुर्गंध आती है। कोलाइटिस, के कारण बड़ी आंत में सूजन भी आ जाती है।

डायरिया (Stomach Care)

डायरिया पाचन मार्ग के संक्रमण या आंतों की बीमारियों का एक लक्षण है। इसमें बड़ी आंत में मौजूद खाने से तरल पदार्थ अवशोषित नहीं हो पाते या अतिरिक्त तरल बड़ी आंत में पहुंच जाते हैं जिससे मल अत्यधिक पतला हो जाता है। इसमें एक दिन में तीन या अधिक बार पतले दस्त होते हैं। गंभीर डायरिया के कारण शरीर में फ्ल्युड की कमी हो जाती है और यह स्थिति जीवन के लिए घातक हो सकती है विशेषकर छोटे बच्चों और उन लोगों में जो कुपोषण के शिकार (victims of malnutrition) हैं या जिनका रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर है।

इन 14 बातों का रखें ध्यान (Stomach Care)

  1.  अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन न करें।
  2.  तनाव भी कब्ज- का एक प्रमुख कारण है इसलिए तनाव से दूर रहने की हर संभव कोशिश करें।
  3.  शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से एक्सिरसाइज और योग करें।
  4.  कब्ज पेट में गैस बनने का एक कारण है जितने लंबे समय तक भोजन बड़ी आंत में रहेगा उतनी मात्रा में गैस बनेगी।
  5.  खाने को धीरे-धीरे और चबाकर खाएं। दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बचाए कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर मिनी मील खाएं।
  6.  खाने के तुरंत बाद न सोएं। थोड़ी देर टहलें। इससे पाचन भी ठीक होगा और पेट भी नहीं फूलेगा।
  7.  अपनी बॉयोलाजिकल घड़ी को दुरस्ती रखने के लिए एक निश्चि त समय पर खाना खाएं।
  8.  मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें।
  9.  चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक का इस्तेमाल कम करें।
  10.  जंक फूड और स्ट्रीट फूड न खाएं।
  11.  संतुलित भोजन करें।
  12.  धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  13. अपने भोजन में अधिक से अधिक रेशेदार भोजन को शामिल करें।
  14.  प्रतिदिन सुबह एक गिलास गुनगुने पानी का सेवन (Drinking warm water) करें।
Stomach Care : पेट की गड़बड़ियों से बचाएंगी ये 14 बातें, Truthful Tips
Stomach Care : पेट की गड़बड़ियों से बचाएंगी ये 14 बातें, Truthful Tips

योगासन से कब्ज को करें दूर
(Yoga asanas beneficial in constipation)

हलासन (Stomach Care)

पेट के लिए कई तरह से यह आसन (हलासन)  बहुत फायदेमंद होता है। दरअसल, यह पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाने और पेट में गैस की समस्या को दूर करने का काम करता है। इसके अलावा, यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सही और ऑक्सीजन की पूर्ति करने में सहायता प्रदान करता है। हलासन से न सिर्फ पेट संबंधित विकारों को दूर किया जा सकता है बल्कि इसकी मदद से आप अपने दिमाग को भी बहुत सारे फायदे पहुंचा सकते हैं। आइये जानते हैं की हलासन को कैसे आप अपने डेली लाइफ में इस्तेमाल कर सकते हैं।

योगासन करने का तरीका

  • हलासन करने के लिए आप किसी दरी या चटाई पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
  • दोनों हाथ आपके कमर से टच होने चाहिए।
  • अब आप धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं और कमर और पैरों के बीच 90 डिग्री का एक कोण बनाएं।
  • आपको धीरे-धीरे अपने पैरों को और पीछे ले जाना है और कोशिश करनी है कि आपके पैर की उंगलियां फर्श में टच हो जाएं।
  • अगर आपके कमर में दर्द होता है तो पैरों को ज्यादा पीछे ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • इस मुद्रा में आप एक मिनट से ज्यादा नहीं रहे।
  • इस आसन को आप तीन से चार बार रोज दोहराएं।
  • इस आसन से पेट की सारी गैस आसानी से गुदा मार्ग के रास्ते से बाहर निकल जाती है और व्यक्ति को आराम मिलता है। इसके साथ साथ यह आसन पाचन क्रिया को दुरुस्त कर कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए एक वरदान का कार्य करता है।

पवनमुक्तासन (Stomach Care)

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम भी  कब्ज होने का एक कारण हो सकता है। व्यक्ति का मल इस सिंड्रोम में सामान्य स्टेज से थोड़ा कठोर हो जाता है जिसका त्याग करते समय व्यक्ति को ज़ोर लगाना पड़ता है। इस सिंड्रोम के होने का कारण तनाव है। पवनमुक्तासन आपके तनाव को कम करता है और कब्ज से राहत दिलाता है। इसके अलावा, इस आसन की मदद से पाचन तंत्र की अच्छी मालिश हो जाती है जिससे भोजन का पचना आसान और कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। इस आसन को करने के लिए आपको नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना है।

योगासन करने का तरीका

  • साफ़ और अनुकूलित वातावरण में एक चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब अपने दाएं पैर को घुटने के पास से मोड़ लें।
  • हाथों की मदद से अपने घुटनों को पकड़ें और अपनी छाती की तरफ ले जाने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में रहते हुए अपने सिर को ऊपर की ओर उठाएं और अपने नाक को घुटने से टच करें।
  • इस स्थिति में लगभग एक मिनट तक बने रहें और धीरे-धीरे दुबारा से सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  • यही प्रक्रिया अपने बाएं पैर के साथ भी करें।
  • इसके बाद आप दोनों पैरो को एक साथ मोड़कर इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करें।

क्या सावधानियां बरतें:

  • खाना खाने के तुरंत बाद इस योग को बिलकुल भी न करें। कम से कम दो घंटे का अंतराल रखें
  • अगर आप कमर दर्द या घुटनों के दर्द से परेशान रहते हैं तो इस योग को करने की सलाह नहीं दी जाती है।

सुप्त बद्धकोणासन (Stomach Care)

कब्ज को दूर करना सुप्त बद्धकोणासन की मदद से बहुत आसान है। यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि, इस बात को एनसीबीआई ने प्रमाणित किया है। एनसीबीआई के अनुसार, इस योगासन की मदद से इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम कम हो जाता है जिससे कब्ज की समस्या का भी अंत हो जाता है। आइये जानते हैं कब्ज दूर करने के लिए आपको सुप्त बद्धकोणासन किस तरह से करना चाहिए।

योगासन करने का तरीका

  • खुले वातावरण और ताज़ा हवा में एक दरी बिछाकर शवासन की मुद्रा पर लेट जाएं।
  • अपने दोनों घुटनों को मोड़ें और दोनों तलवों को एक दूसरे से जोड़ें।
  • दोनों तलवों को अपने कूल्हों के पास ले जाएं। ध्यान रहे आपके तलवे जमीन से टच होने चाहिए।
  • अब अपने दोनों हाथों को सिर के पीछे ले जाएं और फैला लें।
  • इस मुद्रा में लगभग एक मिनट तक बने रहें।
  • इस मुद्रा को चार से पांच बार करें।

क्या सावधानियां बरतें:

  • रीढ़, जांघ और घुटनों से जुड़ी समस्या होने पर इस योगासन को करने की सलाह नहीं दी जाती है।

Stomach Care : पेट की गड़बड़ियों से बचाएंगी ये 14 बातें, Truthful Tips

मयूरासन (Stomach Care)

आपके दिमागी स्ट्रेस को कम और आपके पाचन तंत्र को  मयूरासन सही करता है। इसलिए स्ट्रेस या पाचन तंत्र में खराबी होने की वजह से होने वाले कब्ज को मयूरासन की मदद से ठीक किया जा सकता है। मयूरासन करने से आपकी दिमागी शक्ति का भी विकास होता है और कंसंट्रेशन पॉवर बढ़ता है। कब्ज का इलाज करने के लिए अगर आप मयूरासन करना चाहते हैं तो नीचे दी गई विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं।

योगासन करने का तरीका

  • एक चटाई पर घुटनों के बल बैठ जाएं और अपने हाथों को जमीन पर अपनी आँखों की तरफ सामने टिकाएं।
  • अब आप अपने दोनों एड़ियों को जोड़ लें और श्वास बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुकें।
  • अपने दोनों हाथों की कोहनियों को पेट के पास लगाएं और कोहनियों की मदद से अपनी शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
  • कुछ सेकंड तक इसी मुद्रा में बने रहने के बाद आप फिर से सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इस आसन को आप नियमित रूप से कम से कम 4 से 5 बार जरूर करें।

क्या सावधानियां बरतें:

  • अगर आपने यह योग पहले कभी नहीं किया है तो आपको इंजरी हो सकते हैं। इसलिए अगर आप इसे पहली बार कर रहे हैं तो इसे किसी प्रशिक्षक के निगरानी में ही करें।
  • अगर आप गर्भवती हैं या फिर आपके कंधे और कोहनी में दर्द की समस्या रहती है तो आपको इस योग को करने की इजाजत नहीं दी जाती है।

बालासन (Stomach Care)

नाम से ही पता चल जाता है कि यह आसन बच्चों के सोने के तरीके से जुड़ा हुआ है। यह आसन आपके पेट संबंधित विकारों को दूर करने के लिए जाना जाता है जिसमें कब्ज का इलाज भी शामिल है। एक रिसर्च के अनुसार यह आसन पेट की मांसपेशियों की मसाज करता है और पाचन तंत्र के कार्य को और भी बेहतर बनाता है जिससे कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं कि आखिर बालासन को किस ढंग से किया जा सकता है।

योगासन करने का तरीका

  • बालासन करने के लिए आप चटाई पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
  • गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं और आगे की ओर झुककर अपने माथे को जमीन से टिका दें।
  • अब अपने दोनों हाथों को सिर के आगे पूरी तरह से फ्री अवस्था में छोड़ दें।
  • इस अवस्था में कुछ मिनट तक बने रहें और पुनः से यही प्रक्रिया शुरू करें।
  • इस आसन का लाभ उठाने के लिए आपको इसे कम से कम चार से पांच बार करना चाहिए।

क्या सावधानियां बरतें:

  • पेट का ऑपरेशन या गर्भवती होने की स्थिति में इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • खाना खाने के तुरंत बाद आप इस आसन को नहीं कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से खाना हजम नहीं होगा और आपको उलटी की भी समस्या हो सकती है।

अर्धमत्स्येंद्रासन (Stomach Care)

आपके पाचन तंत्र की अर्धमत्स्येंद्रासन मसाज करता है और आपको कब्ज से छुटकारा दिलाने में सहायता करता है। इसके अलावा यह आपके दिमागी थकान को कम करता है तथा आपके कंसंट्रेशन पॉवर को भी बढ़ाता है। अर्धमत्स्येंद्रासन करने की प्रक्रिया को नीचे बताया गया है।

योगासन करने का तरीका

  • दण्डासन की मुद्रा में बैठ जाएं, इस दौरान आपके रीढ़ की हड्डी और आपका गला स्ट्रेट कंडीशन में होना चाहिए।
  • दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के जांघ के पास ले जाएं। बायां पैर दाएं पैर के ऊपर होना चाहिए।
  • अब आप अपने बाएं पैर को दाएं पैर के ऊपर से निकालते हुए बाएं पैर की एड़ी दायें पैर के घुटने के पास फर्श पर रखें।
  • अब दाएं हाथ को बाएं पैर के जांघ के ऊपर से निकालते हुए बाएं पैर के टखने को पकड़ने की कोशिश करें।
  • अपने बाएं हाथ को पीठ की तरफ ले जाएं और अपने गर्दन को बायीं तरफ घुमाएं।
  • इस स्थिति में कुछ सेकंड्स तक रहें।
  • इस आसन को पांच बार करें।

क्या सावधानियां बरतें:

तुरंत खाने के बाद, गर्भावस्था में या पेट का ऑपरेशन होने के बाद इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन (Stomach Care)

आपके पाचन अंग को सुप्त मत्स्येन्द्रासन पाचन अंग को एक्टिव करता है और खाना को पचने में मदद कर कब्ज से छुटकारा दिलाने में बहुत किफायती साबित होता है। हालांकि, अभी यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित नहीं किया गया है लेकिन योग गुरु इस आसन को करने की सलाह जरूर देते हैं। आप चाहें तो इस आसन को करने से पहले किसी योग गुरु या प्रशिक्षक का परामर्श ले सकते हैं। सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने की विधि बहुत सरल है जिसे नीचे बताया गया है।

योगासन करने का तरीका

  • दरी बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को कंधे की सीध में मुक्त रूप से फैला लें।
  • दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के घुटने पर रखें और और बाएं हाथ की मदद से दाएं पैर को जमीन में टच कराएं।
  • अब अपने सिर को दायीं ओर घुमाएं और अपने दायें हाथ की उँगलियों को देखें।
  • इस मुद्रा में लगभग आधे से एक मिनट तक बने रहें और दुबारा से यही प्रक्रिया अपनाएं।
  • सुप्त मत्स्येन्द्रासन का लाभ उठाने के लिए आपको इसे तीन से चार बार करना चाहिए।

क्या-क्या सावधानियां बरतें:

  • कमर दर्द, गर्दन दर्द, कंधा दर्द या रीढ़ की समस्या वाले लोग इस आसन को न करें।
  • गर्भवती महिलाएं या ऐसी महिलाएं या पुरुष जिनका ऑपरेशन हो चुका है उन्हें भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।

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वज्रासन (Stomach Care)

जिनका भोजन नहीं पचता है जिसके कारण कब्ज की समस्या बनी रहती है वज्रासन की मदद से उन लोगों को फायदा मिलता है। ऐसे लोगों को बस 10 से 20 मिनट तक वज्रासन की स्थिति में बैठे रहना है। ऊपर बताए गए सभी योग के मुकाबले वज्रासन सबसे सरल योग है जिसके अनन्य लाभ हैं। आइये जानते हैं की कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए वज्रासन किस तरह से करना चाहिए।

योगासन करने का तरीका (Stomach Care)

  • साफ़ जगह में चटाई बिछाकर अपने दाएं और बाएं पैर को पीछे की तरफ मोड़कर प्राणायाम की स्थिति में बैठ जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को पालथी में रखें और कमर को सीधा रखें।
  • आपके पैर के टखने एक दूसरे से जुड़े होने चाहिए।
  • इस स्थिति में लगातार पांच मिनट बैठे रहें।
  • इस आसन को तीन बार दोहराएं।
  • इससे एसिडिटी और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।

क्या-क्या सावधानियां बरतें:

  • अगर आपके घुटनों में दर्द रहता है तो यह आसन आपको नहीं करना चाहिए।

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वायु निष्कासन (Stomach Care)

वायु आसन शरीर में जमी हुई गंदगी को वायु के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह आसन कब्ज को दूर कर रोगी के पेट में होने वाली अस्थिरता को शांत करता है। इसके अलावा यह आपके जांघ, घुटनों और कंधों को बल प्रदान करता है। आइये इसे करने की विधि जानते हैं।

योगासन करने का तरीका (Stomach Care)

  • मुर्गे के आकार में अपने दोनों पैर के पंजों के सहारे बैठ जाएं।
  • अपने दोनों हाथों की उँगलियों को पैर के पंजे के नीचे दबा लें और कोहनियों की मदद से घुटनों के ऊपर दबाव बनाएं।
  • अब गहरी सांस लेते हुए अपने सिर को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • अब सांस बाहर निकालते हुए अपने सिर को नीचे की तरफ झुकाएं और अपने पैरो को सीधा करता हुए खड़े हो जाएं।
  • यह आसन लगातार पांच मिनट तक करें।

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सुप्त वज्रासन (Stomach Care)

सुप्त वज्रासन वज्रासन का अपग्रेडेड वर्जन है। इसे करने के लिए आपको वज्रासन आना चाहिए। यह न सिर्फ कब्ज दूर करता है बल्कि पेट की दूसरी भी कई बीमारियों का नाश करता है।

योगासन करने का तरीका (Stomach Care)

  • वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर जमीन से टिका लें।
  • अब अपने कमर और पेट को पीछे की तरफ मोड़ें और ऊपर की तरफ देखें।
  • इस दौरान यह ध्यान दें कि आपके घुटने जमीन से ऊपर नहीं उठने चाहिए।

क्या-क्या सावधानियां बरतें:

  • अगर घुटनों को जमीन में स्पर्श कराते समय दर्द महसूस होता है तो बलपूर्वक घुटनों को जमीन पर स्पर्श नहीं करें।
  • अगर आपको रीढ़ एवं कमर से संबंधित कोई समस्या है तो यह योग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर की राय जरूर लें।

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R. Singh

Name: Rajesh Kumar Gender: Male Years Of Experience: 15 Years Field Of Expertise: Politics, Culture, Rural Issues, Current Affairs, Health, ETC Qualification: Diploma In Journalism

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