Relationship Tips : ससुराल में कैसा हो नव वधू का पहला दिन, जानें
Relationship Tips: Know how the new bride's first day at her in-laws' house should be.

Relationship Tips : हर लड़की जिस दिन से सबसे अधिक घबराती है वह शायद शादी के बाद ससुराल में पहला दिन होता है। 20-22 वर्ष एक परिवार में पलने के बाद उसके लिए शायद यह एक नया जन्म ही होता है। एक बिल्कुल नया परिवार, नये मां बाप, नये भाई बहन और पति जिनकी आदतों, स्वभाव आदि के विषय में कुछ पता नहीं होता।
Pre Marriage Tips : प्रायः ससुराल पहुंचते ही कुछ रस्मो रिवाज पूरे किये जाते हैं जिसके बाद समझदार सासें प्रायः बहू को कुछ समय सोने के लिए कह देती हैं ताकि रात भर के जागने से पैदा हुई थकान दूर हो सके और बहू स्वस्थ व तरोताजा अनुभव कर सके। हां कुछ परिवारों में अब भी बहुओं को कोने में गठरी की तरह बैठा दिया जाता है जिसकी कोई परवाह नहीं करता।
घर आते ही शेष लोग तो अपनी थकान उतारने हेतु सो जाते हैं जबकि गहनों से लदी, भारी साड़ी में गठरी बनी हुई बहू के लिए बैठना भी कठिन हो जाता है। सास व ननदें उसे घेरे हुए आने जाने वाली गली मुहल्ले की औरतों से उसका परिचय कराने में इतनी मशगूल होती हैं कि उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहता कि बहू की कुछ शारीरिक आवश्यकताएं भी हो सकती हैं।
बहू कुछ देर सो कर फ्रेश हो ले तो उसे तैयार हो कर बैठने के लिए कह दें ताकि पास पड़ोस की औरतें आकर बहू से परिचय प्राप्त कर सकें।
नव दंपत्ति हेतु खाना सुपाच्य हो
यह ध्यान दें कि बहू को अधिक देर तक गठरी बन कर न बैठना पड़े। दिन के समय यह विशेष ध्यान दें कि नव विवहित दंपत्ति हेतु खाना हल्का व सुपाच्य हो। विवाह के दिनों में भारी भोजन किये होने के कारण वर वधू के पेट प्रायः खराब ही रहते हैं। यदि उन्हें हनीमून पर जाना है तो भी यह आवश्यक है कि उनका पेट आदि ठीक रहे।
नव दंपत्ति को घूमने भेज दें
दोपहर में भोजन के बाद यदि संभव हो तो नव दंपत्ति को कुछ देर घूमने या फिल्म आदि देखने के लिए बाहर भेज दें। इससे उन्हें मधु रात्रि से पूर्व एक दूसरे को समझने में सहायता मिलेगी और वे खुले मन से अपना वैवाहिक जीवन प्रारंभ कर सकंेगे। यदि शाप को रिसेप्शन हो तो उन्हें समय पर वापिस आने हेतु कह दें ताकि समय पर तैयार हो कर वे रिसेप्शन में शामिल हो सकें।
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अपनी पसंद नव वधू पर न थोपें
रात का भोजन भी दिन को भांति हल्का होना चाहिए। रात का भोजन जल्दी करवा दें ताकि वे समय पर शयन हेतु जा सके। रात्रि हेतु वस्त्रों का चुनाव वधू की इच्छा पर रहने दें। कुछ वधुएं साड़ी पहन सुहाग सेज पर जाना पसंद करती हैं जबकि कुछ नाइटी आदि हल्के वस्त्र पहना पसंद करती हैं। अपनी पसंद नव वधू पर न थोपें।

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शयन कक्ष को सुन्दर बनायें
यथा संभव नव दंपत्ति शयन कक्ष को सुन्दर सुरूचिपूर्ण बनायें। आजकल बडे़ शहरों में तो ऐसी दुकानें हैं जो शयनकक्ष को फूलों से बडे़ सुरूचिपूर्ण ढंग से सजा देते हैं। यदि यह न हो, तो भी शयन कक्ष की फूलों आदि से हल्की सजावट कर दें। वर वधू हेतु कुछ दूध व मिठाई आदि भी रखवा दें।
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नव वधू से आग्रह
कुछ परिवारों में विवाह के अगले दिन काफी नृत्य संगीत आदि किया जाता है। ऐसे अवसर पर सब नाचते हैं और नव वधू से भी आशा की जाती है कि वह भी नाचें। नई बहू बेचारी समझ नहीं पाती कि वह क्या करे? उससे क्या अपेक्षा की जा रही है, बेहतर तो यही है कि नव वधू संबंध में अधिक आग्रह न किया जाये। यूं सब कुछ वातावरण पर निर्भर करता है।
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New Bride को प्यार दुलार
यदि नव दंपति अगले दिन ’हनीमून‘ हेतु जा रहे हों तो दिन में उनके कपड़े आदि तैयार करवा दें व नव वधू को सब कुछ समझा दें ताकि बाहर जा कर कोई परेशानी या हानि न हो। यह न भूले कि आप भी कभी नव वधू बन कर आई थीं और उस समय आपको क्या अनुभव हुआ था। आपका एक दो दिन का प्यार दुलार वधू को सदा के लिए आपका बना देगा।



