Family Relationship Tips: क्या सही है सास विहीन परिवार की तलाश ?

Family Relationship Tips: Is it right to look for a family without mother-in-law?

Family Relationship Tips: क्या सही है सास विहीन परिवार की तलाश ?
Family Relationship Tips: Is it right to look for a family without mother-in-law?

Family Relationship Tips : वे मेरे निवास पर आए थे, विवाह का प्रस्ताव लेकर। उनके प्रस्ताव ने मुझे सजग किया। मेरा पुत्र अभी बी. ई (चतुर्थ वर्ष) का छात्र था। विवाह के लिए मेरे मन में कोई कल्पना तक न थी। मेरा मत है कि बच्चों की नौकरी ठीक से जम जाने के बाद ही उनके लिए कन्या की तलाश कर, चट मंगनी पट विवाह कर देना चाहिए। इसलिए जब मैंने यह विवाह प्रस्ताव सुना तो कुछ बोल न पाया।

सामने की कुर्सी पर बैठे श्री ’क‘ न केवल मेरे दूर के रिश्तेदार थे, वे मेरे अजीज मित्र भी थे। उनसे ’न‘ कहने में संकोच सा था और बनावटी चर्चा चलाना मुझे आता न था। उनकी पुत्री देखी भाली थी और वह भी अभी पढ़ रही थी। चाय की चुस्की के बीच मैंने अपनी कठिनाइयों का विवरण उन्हें समझाया। संक्षेप में कहूं तो प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। वे कुछ उदास से हुए। मैंने उन्हें एक नया प्रस्ताव दिया। एक एम.काम. लड़का जो नौकरी कर रहा था, उससे विवाह रचाने का।

पहले वे प्रसन्न दिखे, फिर बोले, संध्या को आपको जबाब दे दूंगा। वस्तुतः एम काम लड़के के पिता भी मेरे मित्र थे और उन्हें श्री क की कन्या पसंद थी। वे मेरे द्वारा प्रस्ताव रखना चाहते थे, सो अवसर मिलते ही मैंने रख दिया। मुझे विश्वास था यह एक अच्छा संयोग होगा। दहेज का कहीं प्रश्न ही नहीं था।

विवाह के लिए सहमत नहीं

संध्या को वे आए। वे प्रसन्न नहीं थे। बोले, आपके प्रस्ताव पर घर में चर्चा हुई। घर में से कोई भी इस विवाह के लिए सहमत नहीं है। आप अपने पुत्र से यदि विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करें तो प्रसन्नता होगी। उनकी बात से मुझे झटका लगा। रोजगार वाला, पढ़ा लिखा लड़का उन्हें पसंद नहीं और अभी अध्ययन कर रहा, वह पसंद है। मैं कुछ समझा नहीं अतः मैंने उनसे जानना चाहा इसका रहस्य।

पहले तो वे ना नुकरते रहे किन्तु अन्त में दोस्ताना बनाए रखने के अंदाज में कारण बता गए, बात यह है भाई कि हमारी घरवाली चाहती है कि इस कन्या का विवाह जहां कहीं हो, उसकी सास न हो। उसे सास से चिढ़ है। जहां जहां भी सास होती है बहू को बहुत कष्ट होता है। इस लड़के का परिवार भी बड़ा है। लड़के की बहनें भी हैं। इन सबके होते हुए हमारी कन्या को सुख नहीं मिलेगा।

वे फिर बोले, आपकी पत्नी का इन्तकाल हो चुका है इसलिए उनकी समझ में आपका घर सर्वश्रेष्ठ है। अब आप सहमत नहीं हैं तो कहीं और देखेंगे। वे चले गए। मुझे एक धक्का सा लगा। बेचारी सास क्या इतनी बुरी होती है।

घर घर में चर्चा (Family Relationship Tips)

आज विवाह के मामले में कन्या पक्ष के हर घर में एक चर्चा है कि विवाह छोटे परिवार में हो, जहां लड़के पर जिम्मेदारी न हो। कन्या विवाह के बाद अपने सास-ससुर से अलग रहे, यह एक आकांक्षा हर कन्या के माता पिता की रहती है।

घर में कन्या के विवाह की जब कभी भी चर्चा होती है, तब हर मां इस इच्छा को दोहराती है और यदि कहीं ऐसा वर मिल गया तो हर आने वाले व्यक्ति को प्रसन्न मुद्रा में यह सुनाया जाता है। पाश्चात्य प्रभाववश जो व्यक्तिवाद की लहर चली है, उसके अनुसार संयुक्त परिवार प्रथा तो लगभग ढह गई है। उसके खण्डहर ही यत्र तत्र मिलते हैं किन्तु अब लगता है उसके शिखर पर स्थित सास ससुर को भी व्यक्तिवादी विचाराधारा निगल लेना चाहती।

क्या जहर है सास के पद में

सास भी कभी बहू थी। हर बहू को कभी न कभी सास बनना ही है, इसलिए सास शब्द के प्रति यह विचार हमें तो विकार युक्त लगा। परिवार पालना है शिक्षण का। यदि इस शिक्षण शाला में आपकी कन्या सास के प्रति ऐसे विचार सुनेगी तो उसका मानस विवाह के पूर्व ही संयुक्त परिवार सहित सास के प्रति जहरीला हो जायेगा। सास नामक प्राणी को देखते ही वह विकार युक्त हो जायेगी और फिर विवाद व झगडे़ का अन्तहीन सिलसिला चलेगा परिवार में। क्या यह उचित है?

हर कन्या को ऐसा परिवार नहीं मिल सकता जहां कोई जिम्मेदारी न हो, सास न हो, पूर्ण आजादी हो। परिवार में तो गुलाब के फूल की तरह सुगन्ध भी होगी और कांटे भी। गृहस्थ जीवन तपस्या है। घर कोई मौजमस्ती का क्लब नहीं है। इसलिए कन्या के मानस में जब विवाह पूर्व से ही यह विचार समा जाता है कि एक हव्वा है तो उसके परिणाम हमें भुगतने पड़ते हैं।

सास-ससुर का होना एक आनन्द का विषय

सास-ससुर का किसी परिवार में होना एक आनन्द का विषय है। सास अपनी बहू के स्वागत के लिए कितने स्वप्न संजोती है, इसकी कल्पना कीजिए। कोई सास अपनी बहू को सताने की कल्पना ही नहीं करती। सास के साथ अनुभव रहता है। इसलिए स्वाभाविक ही वह मार्ग दर्शक सहेली के रूप में देखी जानी चाहिए। उसका अनुभव अनुशासन सिखाता है जो आदर्श घर के लिए आवश्यक हैं।

सास में जहर नामक द्रव्य होता ही नहीं। व्यक्तिवादी विचार धारा के फलस्वरूप बहुओं का जो मानस बन चुका है उसके फलस्वरूप उसमें जहर के दर्शन किए जाते हैं। अतः नए व आदर्श परिवार के निर्माण की दृष्टि से विवाह पूर्व परिवार की इन व्यक्तिगवादी चर्चाओं को तत्काल बंद करने की आवश्यकता है ताकि कन्याओं का मानस इन विचारों से बच सके और वे नए परिवार में जाकर एक सौम्य वातावरण निर्मित कर सके।

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आप भी कभी सास बनेंगी (Family Relationship Tips)

हर मां अपनी पुत्री के लिए ऐसा परिवार चाहती है जो पुत्री को पूर्ण आजादी दे सके। उस पर कोई नियंत्रण न हो, वह जिम्मेदारी से दूर रहे किंतु अपने पुत्रा के लिए आज्ञाकारी, संस्कारित तथा पारिवारिक कन्या की तलाश में रहती है। हर वर वधू की खोज में यह देखा जा सकता है। वस्तुतः यह संभव नहीं होता।

हम अपनी कन्या के लिए जैसा चाहेंगे, वैसा ही विचार हमारे लिए समाज में मिलेगा, इसलिए जब भी कल्पना हम करें, यह समझ लें कि हर बहू को सास बनना है। सास बनना एक पदोन्नति है। एक महिमा है। उसका गौरव घटाने से अच्छे समाज के निर्माण में बाधाएं खड़ी होगी, इसलिए सास के पद की महिमा का आदर किया जाना आवश्यक है। हर सास पहले मां है। उसके मातृत्व के असीम अनुभव से वह सास बनती है। इसलिए उसके सम्मान को बढ़ाना आवश्यक है।

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परिवार की आवश्यकता सास (Family Relationship Tips)

सास जिस परिवार में सुख पूर्वक रहती है उस परिवार में पति पत्नी के विवाद कम होते है। तलाक तो वहां से कोसों दूर रहता है। परिवार में बच्चे के आवारा बनने की संभावनाएं शून्य होती हैं क्योंकि दादी मां का स्नेह और फटकार हमेशा बनी रहती है।

परिवार में व्यवस्था बनी रहती है क्योंकि सास हर घरेलू काम काज में हाथ बंटाती है। प्रेम का वातावरण बना रहता है। बच्चों का लालन पालन प्रेमवूर्पक होता है। इसलिए परिवार के इस पद को आवश्यक समझ कर इस पद का महत्त्व बनाए रखना अनिवार्य है।

कोई भी समाज हम बनाएं, यदि उसे आदर्श रूप देना है तो त्याग, प्रेम, अपनत्व के गुणों का विकास हमें अवश्य करना पड़ेगा। हम इन गुणों का निरादर कर सुख से नहीं रह सकते। इन गुणों के विकास के लिए इनका परिवार में जीवन रूप दिखाई देना आवश्यक है। इन गुणों के प्रतीक हं सास-ससुर।

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अनुभव के पुंज हैं सास-ससुर

वे सास-ससुर ही नहीं, मां बाप भी हैं। वे अनुभव के पुंज और प्रेम के महासागर हैं। उनके कारण कुछ नियंत्राण, कुछ अनुशासन, कुछ अन्य विश्वास, कुछ प्राचीनता आपके परिवार में रहती है। वे एक परंपरा के अग्रदूत हैं। उनको सम्मान देने का वातावरण बनाइए। यह सारे समाज के भविष्य को उज्जवल बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

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उनको दिया गया दुःख, अपमान, ऋण आपके साथ जीवन भर चलेगा। इस भार को आनन्ददायक बनाइए। यह अपना भार है। इसे भार मान कर आप आदमी कम और कुली ज्यादा हो जाते हैं। वृद्धावस्था का सम्मान कीजिए। वह आपका मार्गदर्शक होगा।

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R. Singh

Name: Rajesh Kumar Gender: Male Years Of Experience: 15 Years Field Of Expertise: Politics, Culture, Rural Issues, Current Affairs, Health, ETC Qualification: Diploma In Journalism

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