यहां जानें Newspaper और प्रिंट मीडिया का इतिहास
सत्य और स्पष्टता को हर काल से समेटे हुए हैं Newspaper

Newspaper : सूचनाओं के इस महादौर में सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विद्युत और कंप्यूटर क्रांति (Electrical and Computer revolution) के इस युग में सभी कुछ भागता नजर आ रहा है। समाचार हो या अन्य कोई जानकारी, सभी तेजी से आंखों के आगे से निकल रही है। सिर्फ पलक झपकने की देरी है। तुरंत नई जानकारी, सूचना, संदेश या समाचार इंटरनेट के द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर या मोबाइल पर आ जाते हैं। वहीं टी.वी. समाचार चैनल भी समाचारों को दिखाने में इतनी ही तेजी दिखा रहे हैं।
कोई चैनल 30 मिनट में दिन भर की सभी बड़ी खबरें दिखाने और बताने में लगा है तो कोई चैनल दो मिनट में दस खबरें दिखा रहा है। इस प्रकार समाचार दिखाने और बताने की होड़ मची हुई है। यदि सोचा जाए तो क्या इतनी तेजी से भागती खबरों से लोगों को कुछ समझ आ भी रहा है या केवल दनादन समाचार दिखाने की होड़ मची है। यह आलोचना नहीं बल्कि थोड़ा ठहर कर समझने की बात है कि क्या वास्तविकता में यह भागमभाग समाचारों के लिए ठीक है भी या नहीं।
Newspaper और प्रिंट मीडिया की भूमिका
समाचार, संदेश और सूचना देने के लिए केवल इलेक्ट्राॅनिक मीडिया माध्यम ही अकेले नहीं हैं बल्कि प्रिंट मीडिया माध्यम भी अपनी अहम् भूमिका निभाते हैं। प्रिंट मीडिया का सबसे शक्तिशाली माध्यम समाचारपत्र का इसमें अपना विशेष योगदान है। समय की गति के साथ समाचारपत्र मासिक, त्रौमासिक व पाक्षिक आदि सोपानों से गुजरकर आज दैनिक रूप में हमारे घर तक पहुंच पाया है।
विश्व में पहली प्रेस लगाने का श्रेय (First Press in World)
दुनियां में प्रेस के आगमन के साथ ही समाचार पत्रों की शुरूआत मानी जा सकती है। विश्व में पहली प्रेस लगाने का श्रेय इंग्लैंड को है और 1702 में लंदन का पहला दैनिक ’डेली काॅर्नट‘ नामक समाचारपत्र अस्तित्व में आया, ऐसा माना जाता है। जहां तक भारत की बात है, भारत में प्रेस को स्थापित करने का श्रेय पुर्तगालियों को है।
भारत में पहली प्रेस लगाने का श्रेय (First Press in India)
भारत में रह रहे पुर्तगालियों ने सन् 1550 में अपने धर्मप्रचार के लिए विदेशों से दो प्रेस मंगवाई थी। इनमें पहली प्रेस गोवा में स्थापित की गई और दूसरी प्रेस को सन् 1578 में तमिलनाडू के तिनेवेली जिले के पीरीकील नामक स्थान पर स्थापित किया गया। इसके बाद अंग्रेजों के आगमन के साथ भारत के अलग-अलग राज्यों में प्रेस स्थापित की गई।
भारत का पहला समाचारपत्र (India’s first Newspaper)
जहां तक भारत में समाचारपत्र के प्रकाश में आने की बात है, सन् 1776 में विलियम बोल्ट्स ने अपनी प्रेस लगाकर समाचारपत्र निकालने की घोषणा की थी परन्तु अंग्रेजी सरकार ने उसे वापस यूरोप भेज दिया। 29 जनवरी 1780 को ’बंगाल गजट या कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर‘ नामक पहला समाचारपत्र कोलकत्ता से प्रकाशित हुआ।
हिन्दी का पहला समाचारपत्र (First Hindi Newspaper)
इसके बाद हिन्दी का पहला समाचार पत्र ’उदंत मार्तंड‘ 30 मई 1826 को कोलकत्ता से ही निकला। धीरे-धीरे प्रेस के चलते लोगों का समाचारपत्रों की ओर आकर्षण बढ़ता गया और भारत के अलग-अलग राज्यों व प्रदेशों से हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं के समाचारपत्र प्रकाश में आने लगे।
प्रेस परिषद् अधिनियम (Press Council Act)
स्वतंत्रता के बाद समाचारपत्रों का प्रकाशन बढ़ा और लोग समाचारपत्रों से जुड़ने लगे। समाचारपत्रों व प्रेस के बढ़ते प्रभाव और तथ्यों को देखते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) में प्रेस की स्वतंत्रता के अधिकार की परिसीमाएं निहित हुई। सन् 1978 में प्रेस परिषद् अधिनियम भी बना। इसके तहत एक 19 सदस्यीय प्रेस परिषद बनाई गई है। इसका उद्देश्य समाचारपत्रों की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
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समाचारपत्रों और समाचार भूमिका को महत्त्व देते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थाॅमस जेफरसन ने कहा था कि यदि हमें सरकार विहीन किंतु प्रेस युक्त राष्ट्रों में से एक को चुनना हो तो मैं बाद वाली व्यवस्था का चयन करूंगा। इस प्रकार किसी भी देश में सरकार हो या न हो परंतु प्रेस अवश्य हो जिससे जनता का सही मार्गदर्शन हो सके।
समाचारपत्रों की लोकप्रियता (Popularity of Newspapers)
देखा जाए तो समाचारपत्रों ने अपने आरंभिक दौर से ही शोषण का विरोध किया, समाज सुधार व पुनर्जागरण द्वारा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में अपना सहयोग दिया। वास्तव में समाचारपत्र सत्य, स्पष्टता और समाचार की जहां तक जानकारी मिलती है, उसे उतना ही लिखने के लिए विश्वसनीय भी रहा है। हालांकि समाचारपत्र केवल साक्षर लोगों तक सीमित हैं लेकिन इसके विशेष गुणों के चलते इसकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती रही है।
Newspapers मतलब लिखित रूप में समाचारों की पूर्ण जानकारी
एक समय था जब इलेक्ट्राॅनिक मीडिया के सबसे सशक्त माध्यम रेडियो का जन्म हुआ तो अमेरिकी समाचारपत्रों के मालिकों ने उसकी जमकर निंदा की क्योंकि उनका मानना था कि रेडियो के आने से समाचारपत्रों का न तो कोई खरीदार होगा और न ही कोई उन्हें पढ़ेगा लेकिन वास्तविकता इसके परे रही क्योंकि समाचारों की पूर्ण जानकारी लिखित रूप में हमें केवल समाचारपत्रों से मिलती है और दूसरी बात यह कि समाचारपत्रों को समय सीमा में बंधकर नहीं बोलना व दिखाना होता। इसी का परिणाम है कि आज बढ़ते टी वी चैनलों के बाद भी नए-नए समाचारपत्र प्रकाश में आ रहे हैं।
Newspaper में News की सत्यता और स्पष्टता
वास्तव में किसी भी समाचार की सत्यता और स्पष्टता के लिए लिखित की महता और प्रमाणिकता अधिक होती है क्योंकि उसे संचित करके रखा जा सकता है और समय पड़ने पर दिखाया जा सकता है। इसलिए लोग समाचारपत्रों को अधिक पढ़ने में विश्वास करते हैं। संपादकीय पृष्ठ पर विद्वानों के विचार और पाठकों की प्रतिक्रिया के छपे पत्र समाचार पत्र की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ाते हैं तथा उसकी सार्थकता को स्पष्ट करते नजर आते हैं। इस प्रकार देखा व समझा जाए तो समाचारपत्र अपने अंदर सत्य और स्पष्टता को हर काल से समेटे हुए हैं।
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