Child and Mother Relationship : आपस में खुलापन लाएं माताएं एवं बच्चे

Child and Mother Relationship: Mothers and children should be open to each other

Child and Mother Relationship: Mothers and children should be open to each other

Child and Mother Relationship : दुनियां में सिर्फ ’मां’ नामक ही एक ऐसा प्राणी होता है जो इंसान के रूप में हो या जानवर के, अपनी छत्राछाया में बच्चों का सदैव मंगल ही चाहता है। स्वयं भूखा रहकर भी उन्हें भरपेट खिलाता है और इसी खिलाने के चक्कर मंे माताएं कुछ अधिक ही चिंतित हो जाती हैं। अतः बच्चों की परवरिश से संबंधित कुछ बातों पर ध्यान देकर हम अपनी मां होने की गरिमा को और बढ़ा सकते हैं बच्चों की नजर में।

सर्वप्रथम तो यह मानकर चलें कि प्रत्येक बच्चे को उसके स्वास्थ्य के अनुसार पर्याप्त मात्रा में भूख लगती ही है। यह अलग बात है कि कभी-कभी प्यार की अधिकता में हमें ऐसा लगे कि वह कम खा रहा है। बार-बार खाने के लिए टोकते रहने से भी बच्चा खाने से न चाहते हुए भी नफरत करने लगता है और यदि उसके शारीरिक गठन के हिसाब से उसकी भूख स्वाभाविक किंतु कम है तो और बच्चों से उसकी तुलना करने की गलती कतई न करें।

जबरदस्ती खिलाने की कोशिश (Child and Mother Relationship)

बच्चे की खुराक यदि कम भी है उसे मजबूर कर जबरदस्ती खिलाने की कोशिश न करें। उसे स्वेच्छा से अपनी भूख के अनुसार ही खाना दें। बस भोजन परोसते समय आपको उसकी पसंद, भोजन की स्वच्छता, पौष्टिकता और संतुलितता का ही ध्यान रखना है।

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बच्चों को तरह तरह के आकर्षक और रंगबिरंगे पदार्थ ही अधिक पसंद आते हैं। उन्हें जब भी खाना परोसें तो छोटे बर्तन में और कम ही दें। पसंद आने पर इच्छानुसार वह और मांग ही लेगा जिससे धीरे-धीरे आपको उसकी रुचि अरुचि का अंदाजा भी होता जाएगा।

Child and Mother Relationship: Mothers and children should be open to each other

मां और बच्चे के बीच समस्या (Child and Mother Relationship)

वर्तमान समय में अब मां और बच्चे के बीच में आहार के बाद दूसरी समस्या है टी.वी.। माताएं अक्सर शिकायत करती हैं, ’’क्या करें हमारा चिंटू, रिंकू, पिंकू तो जब देखो तब टी. वी. से ही चिपका रहता है, उसका तो खाने, पढ़ने यहां तक कि खेलने में भी बिल्कुल ही मन नहीं लगता।’’

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इस समस्या से निपटने का आसान तरीका यह है कि हम भी टी. वी. एक निर्धारित समय तक ही देखें। प्रतिदिन तीन घंटे यानी तीन ही घंटे, यह नहीं कि बच्चे को हम कहें कि बेटे दो घंटे से अधिक टी. वी. देखना अहितकर है और हम स्वयं ही देख रहे हैं पांच घंटे, तो यह तो ’पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ वाली बात हो जाएगी जिसे बाल मन स्वीकारने में अवश्य ही मूक/मुखर विरोध करेगा ही।

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गलत आदत से परहेज (Child and Mother Relationship)

बच्चों के लिए टी. वी. कार्यक्रमों का चयन उनकी उपयोगिता के मद्देनजर आप ही करें। बार बार चैनल बदलने की गलत आदत से यदि आप परहेज करेंगी तो स्वाभाविक रूप से बच्चों से भी यह गलती नहीं होगी। जब वे कार्यक्रम देख रहे हों तो आप उनके आसपास ही रहें और कार्यक्रम समाप्त होने पर उनसे उस विषय पर चर्चा करने का प्रयास करें कि उन्होंने उसे कितना ग्रहण किया और किस प्रकार किया?

यदि वे समझने में कहीं कोई गलती कर रहे हैं तो उन्हें स्पष्ट तर्क देकर सही वस्तुस्थिति से अवगत कराने की कोशिश करें। मां और बच्चे किसी भी आयु मर्यादा के क्यों न हों, उनमें इतना खुलापन और मैत्राीपूर्ण दृष्टिकोण होना चाहिए कि वे एक दूसरे को आसानी से समझ सकें और परस्पर सहारा बनते हुए जिंदगी का लुत्फ उठा सकें।

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R. Singh

Name: Rajesh Kumar Gender: Male Years Of Experience: 15 Years Field Of Expertise: Politics, Culture, Rural Issues, Current Affairs, Health, ETC Qualification: Diploma In Journalism

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