सुर, साधना और संघर्ष की अनकही दास्तान है ‘शब्द उठान सुर तिहाई’
‘Shabd Uthan Sur Tihai’ is an untold saga of melody, spiritual practice, and struggle.

संगीत की धुनों पर मदमस्त होकर थिरकते, आनंद लेते, स्वरलहरियों को महसूस करते और उन पर रोमांचित होते या किसी भावना के आवेग में बहते, क्या आपने कभी सोचा है कि इस दुनिया के बनने, बसने और फैलने के भी कई किस्से और कहानियां रही होंगी? जी बिल्कुल, हर कला की तरह इससे भी जुड़े कई किस्से हैं।
संगीत का स्वरूप जो आप आज देख रहे हैं, दरअसल यह इससे कहीं ज्यादा विविधता लिए हुए है। भारत के छोटे से लेकर बड़े शहरों के अलावा कस्बों और गांव की गलियों में ही न जाने कितने किस्से छुपे हुए हैं। बनारस हो या ग्वालियर या जयपुर ही क्यों न हो, राजा-महाराजाओं के जमाने से कद्रदान इसका आनंद लेते आए हैं।
हालांकि, संगीत के ये किस्से भले ही कितने रोमांचक और भावनात्मक क्यों न हों, लेकिन लंबे दौर से ज्यादातर एक चहारदीवारी के भीतर ही रह गए। गुजरते समय के साथ इन पर धूल की परतें जमती चली गईं, सो अलग। लेकिन कहते हैं कि वक्त सबका आता है और इन किस्सों का भी आ ही गया, जिनकी बुनियाद पर आज का संगीत जगत खड़ा है।
हाल ही में “शब्द उठान सुर तिहाई” नाम से आई किताब पढ़ने के बाद लगा कि न केवल उन धूल की परतों को पूरी लगन से साफ किया गया है, बल्कि सतह के नीचे से उन नायाब हीरों को भी निकाल लाया गया है, जिनकी चकाचौंध से कभी यह दुनिया अपनी पूरी तीव्रता से रोशन हुआ करती थी।
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यकीन मानिए, किताब पढ़ने के बाद कई दिन तक आप उस संसार से बाहर ही नहीं निकल पाएंगे। देव प्रकाश चौधरी इससे पहले कई विषयों पर किताबें लिख चुके हैं, जो लोकप्रियता के तमाम पैमानों को पार कर चुकी हैं, लेकिन इस बार निश्चित रूप से यह पैमाना टूटने वाला है। संगीत के नायाब कलाकारों की तरह ही उनकी लेखनी भी एक जादू सा चलाती है। ऐसा लगता है मानो एक-एक शब्द अब बोल उठेंगे। किताब पढ़ते समय कई बार तो वे दिमाग के कैनवास पर चलते हुए भी दिखाई देने लगते हैं।
किताब में गायिका गौहर जान, बेनज़ीर बाई, रविन्द्र जैन, आर. डी. बर्मन सहित अनेक महान कलाकारों और संगीत घरानों से जुड़े संस्मरण न केवल संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराते हैं, बल्कि बीते दौर की सांस्कृतिक छवि को भी जीवंत कर देते हैं। वहीं एक बार अगर आपने किताब पढ़ना शुरू किया तो मन इसके आखिरी छोर तक पहुंच कर ही मानेगा।
यह किताब संगीत प्रेमियों के लिए तो एक अनमोल सौगात है ही, साथ ही उन पाठकों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो किसी भी कला के पीछे छिपे संघर्ष, अनुशासन, साधना और समर्पण को समझना चाहते हैं।
किताब में बने चित्र इस यात्रा को और भी आनंददायक बनाते हैं। सर्वभाषा ट्रस्ट से छपकर आई इस किताब का मूल्य भी आम आदमी की पहुंच में है। संगीत पर लिखी यह अद्भुत किताब है, या यूं कहिए, दो कलाओं का अलौकिक संगम है, जहां शब्द उठान पर हैं और सुर रुकने का नाम नहीं लेते।
— रोहित राय




