Donate Blood : रक्तदान के लिए प्रेरित करने की जरूरत
Donate Blood: Need to motivate for blood donation

Donate Blood : अभयदान और विद्यादान की तरह वर्तमान में रक्तदान का बहुत महत्त्व है। रक्तदान जीवन है (Blood Donation is Life)। किसी भी गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए उसके शरीर में रक्त चढ़ाना एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है। शरीर के बाहर रक्त किसी भी परिस्थिति में ’पैदा‘ नहीं किया जा सकता। विज्ञान हर तरह से तरक्की कर रहा है, लेकिन रक्त बनाना आज तक भी संभव नहीं हुआ है। इसे केवल रक्तदान से हासिल किया जा सकता है।
रक्तदान (Donate Blood) दो तरह का होता है; एक, जिसमें मरीज को चढ़ाए गए रक्त की भरपाई उसके स्वस्थ परिजन से लेकर की जाती है तथा दूसरे ’स्वैच्छिक‘ रक्तदान से। फिलहाल मांग का केवल 53 प्रतिशत रक्त ही स्वैच्छिक रक्तदान से हासिल होता है। शेष की पूर्ति ’रिप्लेसमेंट‘ से होती है।
1998 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश में पेशेवर रक्तदान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। न्यायालय की मंशा यह थी कि मरीज के परिजनों से लिए गए रक्त की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी लेकिन इससे बचने के भी रास्ते निकल आए हैं। जिन मरीजों के परिजन रक्तदान करने की स्थिति में नहीं होते, वे ऐसे पेशेवरों का सहारा लेते हैं जो रिश्तेदार तो नहीं हैं लेकिन ब्लड बैंक में ’रिश्तेदार‘ बनकर ही पहुंचते हैं।
यहीं वजह है कि अब पेशेवर रक्तदाताओं का एक ऐसा वर्ग खड़ा हो गया जो पैसा लेकर ब्लड बैंक पहुंचने लगा है। बावजूद इसके रक्त की कमी हमेशा बनी रहती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक देश में एबी प्लस प्लाजमा, ओ-पाॅजिटिव, ओ-नेगेटिव का स्टाॅक रहना बहुत जरूरी है। किसी भी आपात स्थिति में जैसे मुंबई पर आतंकवादी हमला जब घायलों को रक्त चढ़ाने के लिए परिजनों की राह नहीं देखी जा सकती हो, उन परिस्थितियों में उपरोक्त रक्त समूह का प्रयोग किया जाता है।
देश में लगभग 25 लाख लोग स्वैच्छिक रक्तदान (Voluntary Blood Donation) करते हैं। सबसे अधिक ब्लड बैंक महाराष्ट्र में 270 हैं। इसके बाद तमिलनाडु (240) और आंध्रप्रदेश (222) का स्थान आता है। दान में मिला हुआ आधा लिटर रक्त तीन मरीजों की जान बचा सकता है। सबसे दुखद स्थिति उत्तर पूर्व के सात राज्यों की है। सातों राज्यों में कुल मिलाकर 29 अधिकृत ब्लड बैंक्स है।
इंडियन सोसायटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहिमेटोलाॅजी (आईएसबीटीआई) के मुताबिक स्थिति इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि हमारे देश में अब भी पूर्ण रक्त चढ़ाने का चलन है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्त को एक जीवनरक्षक औषधि के तौर पर देखा जाना चाहिए।
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अधिकांश मामलों में पूर्ण रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रक्त के अवयव (प्लेटलेट, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी) चढ़ाने से ही मरीज ठीक हो जाता है। दुनिया भर में 90 प्रतिशत मामलों में रक्त के अवयवों का प्रयोग होता है जबकि हमारे देश में केवल 15 प्रतिशत मामलों में ही इनका प्रयोग होता है।
85 प्रतिशत मरीजों को पूर्ण रक्त चढ़ा दिया जाता है। इस विसंगति की दूसरी वजह यह भी है कि हमारे देश में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीनें बहुत ही कम ब्लड बैंकों में लगी हैं। इसके अलावा कंपोनेन्ट्स को अलग करने में लागत बढ़ जाती है।
रक्त की कमी (Blood Deficiency) के कारण देश में हर साल 15 लाख मरीज जान से हाथ धो बैठते है। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन बच्चों की है जिन्हें थेलेसीमिया के कारण जल्दी-जल्दी रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। हादसों के शिकार घायलों, मलेरिया के मरीजों, कुपोषणग्रस्त बच्चों के अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को कई कारणों से रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है।

संक्रमित रक्त का जोखिम (Donate Blood)
दरअसल हमारे देश में स्वैच्छिक रक्तदान अभी भी जीवनशैली का हिस्सा नहीं हो सका है। आज भी ऐसे नवधनाढ्यों की कमी नहीं है जो अस्पतालों के इमरजेंसी रूम्स या आॅपरेशन थियेटरों में पड़े अपने रिश्तदारों को रक्तदान करने के बजाए मुंहमागी कीमत पर खून खरीद लेने की पेशकश करते हैं। ऐसे में पेशेवर रक्तदाता रिश्तेदार बनकर सामने आते हैं। 47 प्रतिशत रक्त की जरूरत इन्हीं लोगों से पूरी होती है। ऐसे स्वैच्छिक रक्तदान के खून की गुणवत्ता तो निश्चित ही गिरी हुई होती है, साथ ही संक्रमित है या नहीं, इसकी भी जांच नहीं हो पाती।
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दूषित रक्त चढ़ाने के कारण एचआईवी का संक्रमण (Donate Blood)
आज देश में हजार में से तीन लोगों को दूषित रक्त चढ़ाने के कारण एचआईवी का संक्रमण होता है। हर रक्तदाता को नियमानुसार पहले तीन महीनों के लिए निगरानी विंडो पीरियड में रखा जाना चाहिए। रक्तदाता के खून में एचआईवी का संक्रमण है या नहीं, यह जांचने के लिए ऐसा करना आवश्यक है। आज जिसने रक्तदान किया हो और परीक्षण में एचआईवी वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई हो, उसका तीन महीने बाद पुनः परीक्षण होना चाहिए। इसमें संक्रमण नहीं आने पर ही रक्त किसी मरीज के योग्य समझा जाता है। हमारे यहां ऐसा नहीं हो पाता। यही वजह है कि पूर्ण रूप से स्वस्थ स्वयंसेवकों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
रक्तदान की मिसाल (Donate Blood)
52 बार रक्तदान कर चुके रावतभाटा कोटा के दिलीप भाटिया जो परमाणु अनुसंधान केंद्र में अधिकारी रहे हैं, उनका मानना है कि रक्तदान पुण्य का काम है। नियमित रक्तदान से उनका शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ है। साथ ही लाभ की दृष्टि से उनका कहना है कि रक्तदान के माध्यम से उनकी सारी महत्वपूर्ण जांचें निःशुल्क हो जाती हैं।
स्वयं रक्तदान करना और दूसरों को प्रेरित करने वाले श्री भाटिया कोटा जिले में एक मिसाल हैं। वे कहते हैं कि ग्लूकोज की बोतल तो बाजार में मिल जाती है लेकिन रक्त केवल मनुष्य के शरीर में ही निर्मित होता है।
कैसा होना चाहिए रक्त (Donate Blood)
इंडियन फार्माकोपिया के मुताबिक मानव रक्त एक औषधि है। इसके लिए कुछ शर्तें और नियम लागू किए गए हैं। मरीज को चढ़ाने के लिए प्राप्त रक्त को एचआईवी एंटीबाॅडीज संक्रमण में मुक्त होना चाहिए। इसे हेपेटाईटिस बी और सी नामक वायरसों के अलावा सिफलिस, मलेरिया आदि से भी मुक्त होना चाहिए।
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कौन कर सकता है रक्तदान (Donate Blood)
कोई भी ऐसा व्यक्ति रक्तदान कर सकता है जो-
- 18-60 वर्ष की उम्र का हो
- तीन साल से जिसे मलेरिया का संक्रमण न हुआ हो
- एक साल से पीलिया न हुआ हो
- उच्च रक्तचाप और डायबिटीज का रोगी न हो
स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ करें नया (Donate Blood)
देश में स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए कई समाजसेवी संस्थाएं कार्य कर रही हैं मगर अब तक जो भी किया गया है, वह अपर्याप्त है। दरअसल जितनी बड़ी मात्रा में हमें शुद्ध रक्त चाहिए उसके लिए एक महा-आंदोलन की जरूरत है खास तौर पर जब स्वाइन फ्लू, डेंगू या मलेरिया (गंभीर स्थिति हो तो) जैसी बीमारी के इलाज के लिए रक्त चढ़ाना निहायत जरूरी हो जाता है।
काॅलेजों में रक्तदान शिविर लगाकर रक्त प्राप्त करने के अब तक किए गए उपाय नाकाफी साबित हुए हैं। छात्रों को परीक्षा में अतिरक्ति नंबर का इंसेंटिव दिया जा सकता है। ग्रेजुएशन की डिग्री पर विशेष तौर पर रक्तदान को रेखांकित किया जा सकता है। नौकरियों में नियमित रक्तदानी के लिए विशेषाधिकार तय किए जा सकते हैं। निजी संस्थानों में स्वैच्छिक रक्तदानी को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया जा सकता है। बारहवीं क्लास से लेकर ग्रेजुएशन को मिलाकर कुल चार साल तक नियमित किए गए रक्तदान के आसन्न संकट से सामना किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’s)
सवाल : मुझे रक्तदान क्यों करना चाहिए?
जवाब : इसका पता लगाने के लिए आपको स्वयं रक्तदान करना होगा। रक्तदान के द्वारा आप सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराकर एक स्वस्थ, खुशहाल समाज की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। रक्त की आवश्यकता किसी को भी कभी भी पड़ सकती है, चाहे हम स्वयं हों या हमारे करीबी। रक्तदान करने से आपको अन्य तरीकों से भी फायदा होता है क्योंकि इससे इस्केमिक हृदय रोगों की संभावना कम हो जाती है
सवाल : क्या रक्तदान का कोई दुष्प्रभाव है?
जवाब : रक्तदान के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते। ब्लड बैंक स्टाफ यह सुनिश्चित करता है कि आपका रक्तदान एक अच्छा अनुभव हो, ताकि आप दोबारा और नियमित रक्तदाता बन सकें। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन काल में 25-100 से अधिक बार दान किया है
सवाल : क्या रक्तदान से मुझे कोई बीमारी जैसे एड्स या हेपेटाइटिस या कोई अन्य बीमारी हो सकती है?
जवाब : चूंकि रक्त एकत्र करने के लिए केवल स्टेराइल डिस्पोज़ेबल्स का उपयोग किया जाता है और इन डिस्पोज़ेबल्स का उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है, इससे रक्तदान से कोई भी बीमारी होने की संभावना समाप्त हो जाती है।
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सवाल : रक्तदान के पात्रता मानदंड क्या हैं?
जवाब : पात्र दाताओं की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए, उनकी जीवनशैली स्वस्थ होनी चाहिए और शरीर का वजन 45 किलोग्राम से अधिक होना चाहिए। हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम% से ऊपर होना चाहिए।
सवाल : मैं कितनी बार रक्तदान कर सकता हूँ?
जवाब : हर तीन-चार महीने के बाद आप रक्तदान कर सकते हैं।
सवाल : रक्तदान से पहले मुझे क्या खाना चाहिए?
जवाब : कुछ भी जो आप आम तौर पर घर पर खाते हैं, रक्तदान से पहले हल्का नाश्ता और ठंडा पेय पीना पर्याप्त है।
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सवाल : रक्तदान करने में कितना समय लगता है?
जवाब : आपसे डोनर फॉर्म भरने के लिए कहा जाएगा। एक चिकित्सा कर्मी आपका मेडिकल इतिहास लेगा और एनीमिया के लिए रक्त समूह के साथ-साथ एचबी की जांच करने के लिए रक्त की एक छोटी बूंद लेगा। सरल चिकित्सा जांच प्रक्रिया के बाद और दान करने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट पाए जाने पर, आपको रक्त संग्रह कक्ष में भेजा जाएगा। दाता से वास्तविक रक्त संग्रह में लगभग 7-10 मिनट लगते हैं और उसके बाद थोड़ा आराम और जलपान होता है।



