Benefits of Oil : प्रकृति के Gift हैं ये 10 प्रकार के तेल, जानें कैसे
Benefits of Oil: These 10 types of oils are gifts of nature, know how

Benefits of Oil : हमारे देश में वैदिक काल से लेकर आज तक तेलों का प्रयोग चला आ रहा है। इनके सेवन से शरीर सुन्दर और सुडौल बनता है। भोजन में तेल या घी का प्रयोग न करने से शरीर में सूखापन आ जाता है और शरीर अस्वस्थ हो जाता है। सामान्यतः सभी तेल पित्त को बढ़ाने वाले होते हैं, मल-मूत्रा को बाँधते हैं, कफ को बढ़ने से रोकते हैं, वात को दूर करने वाले होते हैं। मेधा और अग्नि को बढ़ाने वाले होते हैं।
तेलों का प्रयोग (Use of Oils)
सभी प्रकार के तेलों का प्रयोग (use of oils) भोजन के साथ ही करना चाहिए। स्वास्थ्य के लिए तेल बहुत लाभदायक होते हैं। ये सम्पूर्ण रोगों को नष्ट करने वाले माने गये हैं। इनके सेवन से पाचनशक्ति का संवर्धन होता है। तेल को खाने तथा नहाने से पूर्व शरीर पर मालिश करने से शरीर में बल और सौंन्दर्य इत्यादि की वृद्धि होती है।
तेलों के गुण व लाभ (Benefits of Oil)

अलसी तेल के फायदे (Benefits of linseed Oil)
इसके तेल में विटामिन ई पाया जाता है। इसका सेवन वात, कफ, खाँसी, नेत्रा, के रोगों में लाभकारी होता है। यह पाक में तीखा गाढ़ा होता है। कुष्ठ रोगियों को भी इनके तेल का सेवन करने से अत्यन्त लाभ होता है। आग से जले हुए घाव पर इसके तेल का फाहा लगाने से जलन और दर्द में तुरन्त आराम मिल जाता है।
अलसी को भून कर बकरी के दूध में पकाकर पुल्टिस बाँधने से फोड़े का दर्द बन्द हो जाता है और फोड़ा फूट जाता है। इसके तेल को कान में डालने से कान का दर्द बन्द हो जाता है। अलसी की हरी, ताजा और कोमल पत्ती को खाने से श्वास अच्छा होता है। इसका तेल औषध के रूप में, चित्र बनाने के कार्य तथा वार्निश बनाने में उपयोग होता है।

रेड़ी तेल के गुण (Properties of Castor Oil)
रेड़ी के तेल को एटंड और कास्ट्राऑयल कहते हैं। इसका तेल मधुर, भारी कफ को बढ़ाने वाला होता है। इसके तेल का सेवन हृदय रोग, पुराना बुखार, पेट के वायु संबंधी रोग, अफरा, वायुगोला, शूल, कब्जियत और कृमि को दूर कर देता है। भूख को बढ़ाने वाला, कुष्ठ को नष्ट करने वाला, यौवन को स्थिर रखने वाला, योनि तथा वीर्य को साफ करने वाला, दुर्गधयुक्त, तीखा, रस में मधुर, पाक में कडुवा, दस्त लाने वाला होता है।
इसके शुद्ध तेल को एक छटाँक अथवा आधी छटाँक पीने से जुलाब होता है और यह पेट को साफ कर देता है। चने या मटर के बेसन में इसके तेल को मिलकर शरीर पर उबटन करने से चमड़ी का रंग साफ हो जाता है, शरीर की सुन्दरता को बढ़ाने वाला होता है और झाई रोग को यह दूर करने वाला होता है। इसके तेल का सेवन करने से बवासीर, मस्से की पीड़ा, कमर का दर्द आदि रोगों को दूर करता हुआ स्मरणशक्ति को बढ़ाने वाला होता है।

जैतून का तेल अत्यंत हितकारी (Olive Oil)
Use of Olive oil : जैतून के तेल को ऑलिव ऑयल कहते हैं। शरीर में इसके तेल की मालिश सर्दी को दूर करने वाली, सूजन को मिटाने वाली, लकवा, सुन्न, गठिया, कृमि और वात रोग के लिए अत्यन्त हितकारी होता है।
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स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ तिल का तेल (Best Sesame oil for Health)
तिल के तेल में विटामिन ए, ई, पाया जाता है। तिल का तेल अन्य तेलों की अपेक्षा स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। यह मधुर, सूक्ष्म, कसैला, भारी, ठंडे स्पर्श वाला, मैथुन-शक्ति बढ़ाने वाला, गर्भाशय को साफ करने वाला, कफ, खुजली, वात रोग को नष्ट करता है। सिर में लगाने से बाल चिकने, बड़े, काले, मस्तिष्क की निर्बलता और खुशकी को दूर करता है। तिल के तेल को थोड़ा-सा गर्म करके एक माह तक प्रतिदिन मालिश करने से शरीर की चमड़ी चमकने लगती है शरीर की सुन्दरता बढ़ती है।
इसके तेल में हींग और सोंठ को मिलाकर गर्म करके शरीर में मालिश करने से कमर, जोड़ों, लकवा, वायु और अंग का जकड़ा जाना रोग मिटा देता है। तिल के तेल में लहसुन की कली डालकर, गर्म करके कुछ बूँदें कान में डालने से कान का शूल मिट जाता है। इनको खाने से अधिक मालिश में ही अधिक गुणकारी होता है।

नारियल का तेल (Benefits of Oil Coconut)
नारियल के तेल में विटामिन ई पाया जाता है। इनका तेल ठंडा, मधुर, भारी, ग्राही, पित्तनाशक, कफ उत्पन्न करने वाला, हृदय और बाल को बढ़ाने वाला होता है। इसको सिर के बालों में (Use of oil for Hair) लगाने से बाल चिकने, काले, लम्बे हो जाते हैं और दिमाग की खुशकी दूर होती है।
बर्रे का तेल (Benefits of Oil Barre)
बर्रे का तेल बलकारक, कृमि, वातनाशक, कब्जियत को दूर करने वाला, पित्तविकारों को बढ़ाने वाला होता है।
बहेड़े का तेल (Benefits of Oil Beheda)
बहेड़े का तेल मधुर, ठण्डा, बालों के लिए हितकारी और वायु तथा पित्त को दूर करने वाला होता है।
बिनौला – बिनौले के तेल में विटामिन ई पाया जाता है। इसके सेवन से स्त्राी के स्तन में अधिक दूध उत्पन्न होता है और फोड़ा-फुन्सी, खुजली, दाह, सूजन, जोड़ों का दर्द, गठिया आदि रोगोें को यह दूर करने वाला होता है।
महुुआ का तेल (Benefits of Oil Mahua)
महुआ का तेल गर्म, वातनाशक होता है। वात की सूजन, गठिया रोग पर मालिश करने से ठीक हो जाता है।
राई का तेल (Benefits of Oil Mustard)
राई के तेल में विटामिन ई पाया जाता है। यह वात विकार, चर्म रोग को दूर करने वाला होता है, मूत्राकृच्छ् के रोगों को हानि देता है। इनका तेल सरसों के तेल के बराबर ही खाने के उपयोग में आता है।
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सरसों का तेल (Benefits of Oil Sarason)
सरसों के तिल में विटामिन ए,बी,ई पाया जाता है। सरसों के तेल को कडुवा तेल भी कहा जाता है। यह गर्म होता है। कान में डालने से कान का दर्द (oil for Ear Ache ) बन्द हो जाता है और कान के अन्दर की मैल को बाहर निकाल देता है। आँखों में लगाने से रतौंधी दूर हो जाती है।
इसमें नमक मिलाकर दाँतों में मलने से दाँत दर्द, पायरिया रोग (Toothache, Pyorrhea) दूर होता है और दाँतों को मजबूत बनाता है। इस में चार गुना धतूरे का रस और थोड़ी हल्दी मिलाकर, उबालकर धतूरे का रस जल जाने पर, उतारकर इनमें तेल की मालिश करने से वाताव्याधि से जकडे़ हुए शरीर के अंग को मिटा देता है और वात-विकार को दूर करता है।
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जाड़े के मौसम में सरसों तेल के फायदे (Benefits of Oil Mustard)
जाड़े के मौसम में सरसों के तेल में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर धूप में बैठकर पूरे शरीर में मालिश (Best Body Massage Oil) करने से त्वचा चिकनी, मुलायम और चेहरा सुन्दर हो जाता है। छोटे या नवजात शिशु के पूरे शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करके कुछ देर तक लिए धूप में लिटाने से सूखा रोग अच्छा हो जाता है और शरीर हष्ट-पुष्ट होने लगता है।



