Pest Control : जानें क्या-क्या सावधानी बरतें, 8 Best बातें
Pest Control : Know what precautions to take, 8 important things

Best Pest Control : चूहा एक खतरनाक जीव है, जो प्लेग जैसी महाविनाशकारी बीमारी को पैदा करता है। चूहे की उम्र अमूमन एक साल से कम ही होती है। 2-3 महीने में ही ये बच्चे पैदा करने के काबिल हो जाते हैं। इनकी गर्भावधि मात्रा 23 दिनों की ही होती है। एक बार में एक मादा चुहिया लगभग 4 से 7 बच्चे तक पैदा करती है। चूहों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। प्रथम घर में रहने वाले चूहे, द्वितीय खेतों या छतों पर रहने वाले चूहे तथा तृतीय छुछूंदर।
घरों में रहने वाले चूहे अक्सर सोफे, बांधकर रखे गये बिस्तर, अखबार या पुराने कागजों के ढ़ेर में अपना अड्डा बनाए रखते हैं। छछून्दर अक्सर घर से बाहर या ग्राउण्ड फ्लोर पर ही पाये जाते हैं। भोजन की तलाश में ये पेड़ों और दीवारों पर बड़ी ही चतुराई के साथ चढ़ जाते हैं।
चूहों के शरीर व मल-मूत्र से होने वाले रोग
चूहों के शरीर व मल-मूत्र में कुछ ऐसे रोगाणु होते हैं, जिनके कारण प्लेग, टायफाइड, रैबीज और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी खतरनाक बीमारियां फैलती हैं। चूहों के काटने से 1 से 28 दिन के अन्दर बुखार आ सकता है। कभी-कभी उसके काटने से हुए जख्म में इन्फेक्शन भी हो जाता है। नतीजतन लसिका ग्रन्थि में सूजन आ जाती है, जोड़ों में दर्द होने लगता है तथा भयंकर सिरदर्द के साथ-साथ उल्टी भी होने लगती है। इसके अलावा बदन पर ददोरे भी पड़ जाते हैं।
चूहेदानी का प्रयोग
चूहों पर कंट्रोल करने के लिए चूहेदानी का प्रयोग किया जाता है। चूहा मारने वाली दवाओं में ब्रोमाडिलोन का प्रयोग किया जाता है, जिसके कारण चूहों के शरीर के अन्दर रक्तस्राव होने लगता है और वे मौत के घाट उतर जाते हैं। दवा युक्त पदार्थ खाने से चूहों को तेज प्यास लगती है और वे पानी की तलाश में इधर-उधर भागते हैं।

जानें क्यों पानी के सभी स्रोतों को बन्द कर रख दें
जिस दिन चूहों को मारने के लिए ब्रोमाडिलोन या वैक्स ब्लाॅक का इस्तेमाल किया जाए, उस दिन पानी के सभी स्रोतों को बन्द कर या ढककर रख दें। खासकर बाथरूम का दरवाजा बन्द करना न भूलें। चूहों को घर में रहने देने से न सिर्फ स्वास्थ्य की ही हानि होती है बल्कि वे कीमती कपड़ों, बिस्तरों व दस्तावेजों को भी काटकर बर्बाद कर डालते हैं अतः चूहों को नष्ट कर देना ही बेहतर होता है।
पेस्टिसाइडस से स्वास्थ्य नुक्सान (Pest Control)
हानिकारक कीड़े-मकौड़ों से छुटकारा पाने के लिए आमतौर पर लोग पम्प या एअरोसोल कैन्स के जरिये (Pest Control) अपने घरो में स्प्रे करते हैं या फिर मैट्स या लिक्विड के रूप में वेपोराइजर का इस्तेमाल करते हैं जबकि इन पेस्टिसाइडस से हमारे स्वास्थ्य को भी अच्छा खासा नुक्सान पहुंच सकता है।
कीटनाशक दवायें मनुष्य के लिए जहर (Pest Control)
जितनी भी कीटनाशक दवायें होती हैं या तो वे आर्गेनोफाॅस्फोरस होते हैं या फिर कार्बोमैट्स और ये दोनों ही रसायन न सिर्फ कीड़े-मकौड़ों के लिये बल्कि समान रूप से मनुष्य के लिए भी जहर का काम करते हैं। ये रसायन नाक के माध्यम से या फिर चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
अस्थमा होने का भी अंदेशा (Pest Control)
वेपोराइजर्स में एलोथ्रिन्स (पाइरेथाॅयड्स) होता है, जो स्नायुतंत्र को उत्तेजित कर देता है। नतीजतन कफ की शिकायत पैदा हो जाती है और फिर उसका श्वास नली की नाजुक मसल्स के टोन पर कुप्रभाव पड़ता है। इसके अलावा ब्राकोस्पास्म्स या सांस की नली में ऐंठन या फिर अस्थमा होने का भी अंदेशा होता है।

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खतरान भी है मास्क्विटो मैट
अगर कोई अनजाने में मास्क्विटो मैट (mosquito mat) खा लेता है तो उसकी सांस फूल सकती है, उसे उल्टी या ऐंठन हो कर उसकी मौत भी हो सकती है। अगर किसी स्प्रे को कोई अचानक पी लेता है तो वह भी घातक सिद्ध हो सकता है। संयेाग से अगर कभी ऐसी स्थिति आ जाती है तो उससे निपटने के लिए पैम (पैरालाइडिन एमिनो मोनोफाॅस्फेट) इंजेक्शन लगवाना चाहिए। पैम के अतिरिक्त एट्रोफिन इंजेक्शन का भी उपयोग किया जा सकता है।
साइड इफेक्ट्स
अगर सांस के जरिए कोई दवा अत्यधिक मात्रा में शरीर में पहुंच जाती है तो उससे सांस की समस्या, सिरदर्द, चक्कर, ऐंठन, उल्टी आदि की शिकायतें हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त आंखों की रोशनी कम हो सकती है या फिर रोशनी पूरी तरह जा भी सकती है। दवाओं में मिट्टी का तेल मिला होने के कारण इसके साइड इफेक्ट्स गंभीर रूप भी धारण कर लेते हैं।
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अगरबत्तियां दमे को बढ़ाती हैं
मच्छरों को भगाने के लिए उपयोग में लायी जाने वाली अगरबत्तियां दमे को बढ़ाती हैं या फिर सांस संबंधी अन्य समस्यायें भी पैदा कर सकती हैं। क्रीम आदि के इस्तेमाल से अत्यंत संवेदनशील चमड़ी वालों को खुजली और ददोरा होने का डर रहता है।

बच्चों की पहुंच से दूर रखें (Pest Control Tips)
अन्य बेट्स भी खतरनाक साबित हो सकती हैं। अगर कोई बच्चा उन्हें निगल जाता है। इन सभी पेस्टिसाइडस से होने वाली समस्याओं से निजात पाने का एक ही तरीका है कि इन्हें सुरक्षित ढंग से कुण्ठित या निराश लोगों तथा बच्चों की पहुंच से दूर ही रखना चाहिए। किसी भी कीटनाशक दवा के उपयेाग से पहले इन बातों पर ध्यान अवश्य देना चाहिए।
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Pest Control : 8 महत्वपूर्ण बातें
- किसी भी कीटनाशक दवा (pest control medicine) को उपयोग में लाने से पहले उसके उपयोग की विधि और चेतावनियों को अवश्य पढ़ लेना चाहिए।
- दवा और दवा के उपयोग में काम आने वाली मशीनों को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें। उन्हें उस कपबोर्ड में कभी न रखें, जिनमें खाना रखते हैं।
- बच्चों और पालतू जानवरों की मौजूदगी में कभी किसी दवा का इस्तेमाल न करें।
- दवा के छिड़काव के बाद किचन काउंटर आदि को पोंछकर साफ कर दीजिए।
- गर्भवती महिला को कभी भी कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं करना चाहिए।
- कोई भी दवा घरेलू उपयेाग में आने वाले बर्तनों मेें कभी न डालें। न तो मिलायें और न ही रखें।
- अगर किसी दवा का छिड़काव करना हो तो खाद्य पदार्थों को उससे दूर रखें। बर्तनों को खुला न छोड़ें और पंखे भी बन्द रखें।
- अपने शरीर पर या शरीर के आस-पास स्प्रे न करें। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि दवा आंख या नाक में न जाये।
फालतू कीटनाशक दवाओं को घर में ऐसे स्थानों पर रखिए जहां आम सदस्यों की पहुंच न हो। दवा का खतरनाक असर होते ही फौरन चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए।



