Health Tips Latest : स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है गप्पें मारना, जानें कैसे

Health Tips Latest: Gossiping is beneficial for health, know how

Health Tips: Gossiping is beneficial for health, know how
Health Tips Latest: Gossiping is beneficial for health, know how

’बसंती, तुझे एक मजेदार बात बताऊं। मैंने कल मिसेज तिवारी को पिक्चर हाॅल में देखा। वो भी पता किसके साथ?‘ ’जानती हूं किसके साथ होगी। अपने तथाकथित बाॅस तनेजा के साथ। क्यों, ठीक कहा न चमेली। ’मुझे तो कुछ कहने की जरूरत नहीं। ऐसा लगता है कि कभी किसी थाने में इंस्पेक्टर रही होगी तुम।

जब भी दोनों सहेलियां अपने गप्पों का पिटारा खोलकर बैठती हैं, सारे जहान की खैर-खबर एक दूसरे को सुनाकर ही दम लेती हैं। खूब गप्पें मारती हैं और मस्त रहती हैं।

गप्पें मारना क्यों जरूरी

 आप सोच रहे होंगे कि उन्हें कोई काम नहीं होगा, शायद तभी इतना गप्पें मारने का मजा ले पाती हैं लेकिन ये दोनों सहेलियां न सिर्फ घरेलू कामों में सुघड़ हैं, मोहल्ले में अपनी जिंदादिली के लिए मशहूर भी हैं।

ब्रिटिश उपन्यासकार जोसफ काॅनरेड के अनुसार कोई भी अपने आपको गपोड़शंख कहलवाना पसंद नहीं करता लेकिन सभी गप्पें सुनने और गप्पें मारने का आनंद जरूर लेते हैं। नए शोधों के अनुसार गपोड़ी न केवल मानसिक तनाव से मुक्त होते हैं बल्कि उनमें हृदय रोग भी कम होता है।

गौर करें कि इसका साधारण सा फंडा यह है कि खूब गप्पें मारिए, खूब हंसिए तो रोजमर्रा के तनावों से आप बचे रहेंगे। गप्पें मारना न केवल सेहत के लिए बढ़िया साबित होता है, बल्कि इससे आपके सामाजिक संपर्क भी बढ़ते हैं और आप लोकप्रिय भी होते हैं।

हम सभी गप्पें मारना पसंद करते हैं शायद हमारी बातों का एक तिहाई हिस्सा गप्पों पर आधारित होता है। फिल्म, खानपान, मनोरंजन, प्रेम, सेक्स, फैशन और रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं से जुड़ी बातें ही तो हमारी गपशप में शामिल होती हैं।

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स्वास्थ्य पर प्रभाव

 जब हम गप्पें मारते हैं तो हमारी कल्पनाशक्ति चरम पर होती है। मनगढ़ंत बातों से अपने सहयोगी और सहेलियों को बहलाना कोई साधारण बात नहीं। हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक जब रोजमर्रा के काम आप पर हावी होने लगें तो आप तनाव रहित होने के लिए और आरामदायक स्थिति में आने के लिए कुछ देर जरा गप्पें मारकर तो देखिए। समस्या का हल आपको गप्पों में मिलेगा। उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति अगर खूब गपशप करें तो एक हद तक इन रोगों से उपजे तनाव को दूर किया जा सकता है।

हृदय रोग विशेषज्ञ के मुताबिक जब मरीज बाईपास सर्जरी कराकर अस्पताल से जाते हैं, तब उन्हें ज्यादा से ज्यादा बात करने, तनाव रहित रहने और हल्की-फुल्की गपशप यानी लाइट मूड की बातें करने की सलाह दी जाती है। विमहंस अस्पताल के वरिष्ठ मनोविशेषज्ञ डा॰ जितेंद्र नागपाल मानते हैं कि महिलाएं अपने मेनोपाॅज के दौरान गप्पों का सहारा लें, तो उनका चिड़चिड़ापन काफी हद तक दूर हो सकता है।

और भी हैं फायदे

 इसके अलावा मनोविशेषज्ञ बताते हैं कि आॅफिस में गप्पें मारना सीधे काम को प्रभावित करता है। कार्यक्षमता बढ़ती है और वातावरण में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है लेकिन आॅफिस में गप्पों का स्तर काफी सुलझा हुआ और एक दायरे तक सीमित होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर समस्या होने की संभावना बनी रहती है।

अस्वस्थ और विद्वेषपूर्ण गप्पों से एक दूसरे से अनबन होने के कारण न केवल आॅफिस का वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है बल्कि इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। शरीर में कुछ ऐसे टाॅक्सिन बनने लगते हैं, जो आगे चलकर रक्तचाप, अवसाद जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। तो गप्पें मारिए, लेकिन संभल कर।

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कौन कितना गप्पी ?

 इंग्लैंड के सोशल ईशू रिसर्च सेंटर द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक गप्पें मारने में 50 प्रतिशत पुरूष आगे रहते हैं, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 70 है, यानी दुनियां भर में महिलाएं गप्पें मारने में पुरूषों से आगे हैं। वैसे भारतीय पुरूष भी गप्पें मारना उतना ही पसंद करते हैं जितना महिलाएं।

बस फर्क इतना है कि महिलाएं अपनी गप्पों में फिल्म, फैशन, प्रेम, पड़ोसियों और पारिवारिक रिश्ते आदि विषयों को चुनती हैं जबकि पुरूषों की गप्पों में बास की सख्ती, पारिवारिक तंगी, फिल्म और लड़कियां शामिल होती हैं।

अध्ययन के मुताबिक पुरूषों को राजनैतिक, काम और शैक्षणिक विषयों पर गप्पें मारना पसंद नहीं, खासकर तब जब गपोड़ियों की मंडली में महिलाएं शामिल हों।

R. Singh

Name: Rajesh Kumar Gender: Male Years Of Experience: 15 Years Field Of Expertise: Politics, Culture, Rural Issues, Current Affairs, Health, ETC Qualification: Diploma In Journalism

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