Best Home Remedies : घरेलू उपायों की बहुउपयोगी सलाह
Useful advice on home remedies

आज के समय अगर हमें शारीरिक रूप से कोई स्वास्थ्य समस्या होती है तो हम तुरंत डाॅक्टर के पास पहुंच जाते हैं और अंग्रेजी दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। मैं यह नहीं कहती कि अंग्रेजी दवाएं गलत होती है या डाॅक्टर के पास जाना गलत है। लेकिन छोटी-छोटी बीमारियों को आप घर बैठे खुद दूर कर सकते है। इस आलेख के द्वारा यही बताया जा रहा है। आईये जानते हैं:-
- भूख न लगे या कुछ खाने की इच्छा न होने पर अजवायन में स्वादनुसार काला नमक मिलाकर, पीस कर, चुटकी भर काली मिर्च, पिसा पोदीना, सब गर्म पानी से फंकी लेने पर अरूचि की शिकायत दूर हो जाती है।
- पेट में रूकी हुई गैस दूर करने के लिए दो लहसुन मुनक्का में लपेट कर भोजन के बाद चबाकर निगलने पर गैस बाहर निकल जाएगी।
- दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी में लेने से पेट दर्द दूर हो जाता हैं
- सुबह-शाम दो भाग दही और एक भाग शहद मिलाकर चाटने से कीड़े मर जाते हैं।
- सरसों के तेल की मालिश पेट पर करने से कब्ज में आराम होता है।
- दो लौंग गर्म पानी से लेने पर जी मिचलाना, हिचकी, मुख का बिगड़ा स्वाद, चक्कर, उबकाई आना सब ठीक हो जाता है।
- अदरक के लच्छे पर नमक छिड़क कर भोजन के साथ सेवन करने पर दस्त में आराम मिलता है।
- पेचिश में भिंडी की सब्जी खाना लाभदायक है।
- पीलिया होने पर 1 कप पानी में 1 चम्मच ग्लूकोज डाल कर दिन में 5.5 बार लें।
- ताजे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके चूसने से पुरानी नई सब तरह की हिचकी बंद हो जाती है।
- अदरक को घोलकर एक टुकड़ा मुख में रखकर चूसने से कफ असानी से निकल जाती है।
- हफ्ते में दो बार लहसुन की 4 फली लेने पर सर्दी नहीं लगती।
- अजवायन को गर्म-गर्म पानी के साथ लेने पर खांसी में आराम मिलता है।
- भोजन में हींग का प्रयोग अवश्य ही करें। दुर्बल हृदय को शक्ति मिलती है। रक्त संचार सरलता से होता है।
- दिल के दौरे पड़ने की संभावना होने पर 5 कलियां लहसुन तुरंत चबाकर निगल ले। दौरा पड़ने के चांस निर्मूल सिद्ध होते हैं फिर लहसुन को दूध में उबाल कर लेते रहना चाहिए।

अति गुणकारी दालचीनी (Super Strong Cinnamon)
दालचीनी का उपयोग रोजाना मसालों में सुगन्ध और स्वाद लाने के लिये किया जाता है। यह मुखशुद्धि और कंठशुद्धि करती है।
- मोटी दालचीनी उष्ण, तीखी, रूक्ष और पित्तकारक है। यह कफ, वायु, खुजली तथा अरूचि का नाश करने वाली एवं हृदय रोग, मूत्राशय के रोग, अर्श, कृमि मिटाने वाली और वीर्यकारक है।
- पतली दालचीनी मधुर, कड़वी, तीखी, सुगन्धित, वीर्यवर्धक, शरीर के रंग को निखारने वाली, वायु पित्त, मुखशोष और तृषा मिटाने वाली है।
- दालचीनी का सेवन करने से अजीर्ण, उल्टी, लार, उदरशूल और अफरा मिटता है। यह स्त्रिायों का ऋतुस्राव साफ लाती है और गर्भाशय का संकोचन करती है।
- दालचीनी पानी में पीसकर गर्म करके कनपटी पर लेप करने से अथवा अर्क लगाने से सर्दी के कारण होने वाला सिरदर्द मिटता है।
- दालचीनी, अदरक और काली मिर्च का काढ़ा पीने से जुकाम दूर होता है।
- दालचीनी का 2-3 बूंद तेल एक कप पानी में मिलाकर पीने से इन्फ्लूएँजा, गृहणी, आंत्राशूल, हिचकी, उल्टी आदि में काम करता है।
- वैज्ञानिक मतानुसार अत्यंत उपयोगी सुगन्धित औषधि है। यह उष्ण दीपन, पाचन, वातहर, स्तंभण, गर्भाशय उत्तेजक, गर्भाशय संकोचक एवं शरीर उत्तेजक है। यह जंतुनाशक है और कालज्वर टाइफाइड, टाइफस तथा अन्य संक्रामक रोगों का नाश करती है एवं उबकाई, उल्टी व अतिसार को मिटाती है।
- दालचीनी का तेल उत्तेजक है अतः यह दांत का शूल, पेट का शूल, जीभ का रूक जाना, जबान बन्द हो जाना आदि पर गुणकारी हैं।
Note : गरम प्रकृति वालों को दालचीनी का सेवन नहीं करना चाहिये। दालचीनी के दीर्घकाल तक सेवन करने से नुपंसकता आती है। इसका तेल भी अत्यधिक मात्रा में विषतुल्य है।



