Teeth Care : जानें टेढ़े-मेढ़े या बाहर निकले दांतों से कैसे मिले मुक्ति
Teeth Care: Know how to get rid of crooked or protruding teeth

Teeth Care : चेहरे की सुंदरता में दांतों का भी हाथ होता है। यदि दांत टेढ़े-मेढ़े हैं तो अच्छे खासे चेहरे का सौंदर्य भी जाता रहता है। कभी-कभी लोगों में अपने टेढे-मेढ़े दांतों के कारण एक हीन ग्रंथि भी उपज जाती है जिसका असर उनके पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है।
विभिन्न भाषाओं के बहुत से शब्द ऐसे हैं जिनका उच्चारण दांतों के सहारे होता है। दांतों के अव्यवस्थित होने के कारण बोलचाल में तो रुकावट आती ही है साथ ही खाने-चबाने में भी परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं। साथ ही यदि दांतों में भोजन के कण फंसे पड़े रहते हों तो दांत संबंधी अनेक बीमारियां हो सकती हैं।
Contents
- दांत टेढ़े-मेढ़े क्यों होते हैं?
- इससे होने वाली समस्याएं
- प्रकृति निर्धारित करती है दांतों का सुव्यवस्थित होना
- Teeth Care : दांत बाहर आने के कुछ कारण
- दूध के दांत की महत्वपूर्ण भूमिका (Teeth Care)
- Teeth Care : उबड़-खाबड़, टेढ़े-मेढ़े दांतों का इलाज
- दांतों के इलाज के लिए तार (Teeth Care)
- सही ऑर्थोडॉन्टिस्ट कैसे चुनें?
दांत टेढ़े-मेढ़े क्यों होते हैं?
अनुवांशिक कारण : बहुत बार ये समस्या हमें हमारे माता-पिता से विरासत में मिलती है। अगर परिवार में किसी के दांत असामान्य तरीके से बढ़े हैं, तो अगली पीढ़ी में भी इसका असर हो सकता है।
बचपन की आदतें : बचपन में उंगली चूसना, जीभ से दांतों को धक्का देना या बोतल लंबे समय तक मुंह में लगाकर रखना – ये आदतें जबड़े की बनावट को बिगाड़ सकती हैं।
दांतों की भीड़भाड़ : अगर आपके जबड़े में दांतों के लिए जगह कम है तो नए दांत गलत दिशा में निकल सकते हैं और टेढ़े हो सकते हैं।
इससे होने वाली समस्याएं
- आत्मविश्वास में कमी : टेढ़े-मेढ़े दांतों की वजह से लोग मुस्कुराने से कतराते हैं, जिससे आत्मविश्वास पर असर पड़ता है।
- ठीक से चबाने में दिक्कत : गलत तरीके से उगे दांत चबाने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं जिससे पाचन में भी परेशानी हो सकती है।
- बोलने में परेशानी : कुछ शब्दों का उच्चारण करना कठिन हो सकता है, खासकर जब दांत आगे की ओर निकले होते हैं।
इलाज के आधुनिक विकल्प : ब्रेसेज़
- धातु ब्रेसेज़ – पारंपरिक लेकिन सबसे कारगर तरीका
- सिरेमिक ब्रेसेज़ – कम दिखने वाले और सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर
- लिंगुअल ब्रेसेज़ – दांतों के अंदर की तरफ लगाए जाते हैं, बाहर से दिखाई नहीं देते
इनविज़लाइन : यह पारदर्शी एलाइनर होते हैं जो दिखते नहीं और आरामदायक होते हैं। इन्हें आप खाना खाते समय निकाल सकते हैं।
रिटेनर : इलाज के बाद दांतों को अपनी जगह पर बनाए रखने के लिए रिटेनर ज़रूरी होते हैं।
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दांतों के अव्यवस्थित होने के कारण कुछ तो प्राकृतिक या जन्मजात होते हैं। परन्तु निजी असावधानियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निजी असावधानियों के कारण भी दांत अव्यवस्थित हो जाते हैं।
आर्थोडोन्टिक्स चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो दांतों के सौंदर्य संबंधी समस्याओं का निदान करती है। इसके द्वारा दांतों को सुंदर बनाने के साथ-साथ उनकी कार्यकुशलता को भी निखारा जाता है।
प्रकृति निर्धारित करती है दांतों का सुव्यवस्थित होना
यों तो दांतों का सुव्यवस्थित होना बहुत कुछ प्रकृति निर्धारित करती है परन्तु कुछ बीमारियां भी ऐसी होती हैं जिनसे दांत टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। क्लींडोक्रोनिफल तथा माइक्राग्लेम ऐसी बीमारियां हैं जिनसे होंठ तथा तालू के साथ-साथ जीभ तथा जबड़े भी प्रभावित होते हैं तथा दांतों का सही विकास नहीं हो पाता। कभी-कभी प्लूरिड ग्रंथियों के बढ़ने से भी ऊपर के जबड़े का सही विकास नहीं हो पाता जिससे दांतों के विकास में रुकावट आती है।
Teeth Care : दांत बाहर आने के कुछ कारण
इनके अतिरिक्त मुंह से सांस लेने, बचपन में अंगूठा या अंगुली चूसने, जीभ चूसने, होठों को चूसने या काटने तथा नाखून काटने जैसी आदतों के चलते भी दांत बाहर आ जाते हैं जोकि देखने में बहुत भद्दे लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चा अंगूठा चूसता है तो उसके ऊपर के दांत और जबड़ा आगे आ जाते हैं। इसी प्रकार होंठ चूसने से ऊपर के दो दांत अव्यवस्थित हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर जीभ काटने से ऊपर और नीचे के दोनों जबड़े प्रभावित होते हैं।

दूध के दांत की महत्वपूर्ण भूमिका (Teeth Care)
दूध के दांत भी दांतों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं यदि दूध के दांत समय के पहले ही गिर जाते हैं तो उस जगह पर जबड़े का ठीक विकास नहीं हो पाता और दांत की वह जगह भी हमेशा के लिए बंद हो जाती है। इसी प्रकार यदि दूध के दांत लंबे समय तक टिके रहते हैं तो स्थाई दांत निश्चित स्थान पर न उगकर इनके आसपास उगते हैं जिससे जीभ और दांतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
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Teeth Care : उबड़-खाबड़, टेढ़े-मेढ़े दांतों का इलाज
उबड़-खाबड़, टेढ़े-मेढ़े दांतों का इलाज यों तो किसी भी आयु में किया जाता है परन्तु जितना जल्दी इसका इलाज हो उतना अच्छा होता है क्योंकि कम उम्र मेें जबड़े मुलायम रहते हैं जिससे ज्यादा जल्दी और ज्यादा अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। इसमें कम से कम एक वर्ष का समय तो लगता ही है। इलाज के अंतर्गत डाॅक्टर कभी-कभी सुधारात्मक तरीके भी अपनाते हैं जैसे व्यक्ति को होंठ या अंगूठे चूसने से रोकना आदि।
दांतों के इलाज के लिए तार (Teeth Care)
कई बार दांतों के इलाज के लिए तार भी लगाया जाता है। ज्यादातर मामलों में तार अस्थाई तौर पर लगाए जाते हैं परन्तु कुछ मामलों में तार स्थाई तौर पर भी लगाए जाते हैं। इन तारों से दांतों पर दबाव डाला जाता है जिससे कि दांत सही जगह पर व्यवस्थित हो जाएं। गंभीर स्थितियों में विशेष प्रकार के रबर बैंड का प्रयोग भी किया जाता है।
आर्थोडोन्टिक्स के इलाज के बाद मरीज को च्वुइंगम, टाॅफी और चाकलेट जैसी चीजें नहीं खानी चाहिएं तथा मीठे और ज्यादा ठंडे खाद्य पदार्थों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। साथ ही इन मरीजों को सेब, संतरा या मूंगफली खाने से भी बचना चाहिए।
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प्रायः दांतों को उनकी सही जगह पर लाकर छोड़ देना ही काफी नहीं होता। इसके बाद भी इनके सरकने की संभावना बनी रहती है। इसलिए यह जरूरी है कि इलाज खत्म होेने के भी कुछ समय तक डाॅक्टर से सलाह लेते रहें।
सही ऑर्थोडॉन्टिस्ट कैसे चुनें?
अनुभव और योग्यता : ऑर्थोडॉन्टिस्ट का चुनाव करते वक्त उनके अनुभव और योग्यता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अच्छे डॉक्टर के पास न केवल शिक्षा, बल्कि अनुभव भी होना चाहिए, ताकि वे सही इलाज योजना बना सकें। डॉक्टर की प्रमाणित डिग्रियां और पेशेवर रिकॉर्ड पर ध्यान दें।
समीक्षाएं और फीडबैक : ऑर्थोडॉन्टिस्ट को चुनने से पहले उनकी समीक्षाएं और फीडबैक पढ़ना भी मददगार हो सकता है। इंटरनेट पर आपको उनकी पिछली मरीजों की राय मिल सकती है, जो आपको सही निर्णय लेने में मदद करती हैं।
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