Health Tips: जानें मदिरा व धूम्रपान से ज्यादा खतरनाक क्या है ?
Health Tips: Read and know what is more dangerous than alcohol and smoking

Health Tips : इस भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते जा रहे है। सिर्फ सही समय पर उचित खान-पान से आप अपने आप को स्वस्थ्य नहीं रख सकते। कई ऐसी चीजें है जिनको हम नजरअंदाज कर देते है। इस लेख में हम स्वास्थ्य से जुड़े कुछ रोचक तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं जो आपको स्वस्थ्य रखने में मददगार साबित हो सकते हैं।
मदिरा व धूम्रपान से ज्यादा अकेलापन खतरनाक (Health Tips)
मदिरापान एवं धूम्रपान को खतरनाक बताया जाता है किंतु अकेलापन उससे भी खतरनाक है। अकेलेपन को भी एक शोध ने बहुत खतरनाक माना है एवं सिगरेट व शराब से ज्यादा खतरनाक पाया है। पति या पत्नी की मौत के बाद इसीलिए दूसरा सदस्य एकाकीपन के भाव से जल्द काल कवलित हो जाता है।
अकेलेपन के दर्द का कोई उपचार नहीं है। ऐसा खासकर के उस सदस्य के साथ होता है जो परिवार, दोस्त व पड़ोसियों से कटकर रहता है एवं जिसमें सामाजिकता का भाव नहीं होता। शोध के ठीक विपरीत कुछ ऐसे सदस्य भी मिल जायेंगे जो नितांत अकेले रहते हैं और अकेले रहकर अपने ही कार्य में व्यस्त रहते हैं, उसी में डूबे व रमे रहते हैं। संन्यासी भाव के ऐसे अनेक व्यक्ति मिल जायेंगे जो अकेले रहकर भी दीर्घ जीवी होते हैं।
चहलकदमी ज्यादा लाभदायी है (Health Tips)
पैदल चलना, पदयात्रा करना, टहलना, चहलकदमी करना सब एक हैं। यह जिम एवं भारी व्यायाम से ज्यादा लाभदायी है। पैदल चलने को तो हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बहुत पहले ही कसरतों की महारानी कहकर संबोधित किया था। यह व्यायाम का सबसे सरल, सस्ता व सटीक माध्यम माना जाता है।
चलते-चलते सम्पूर्ण शरीरांगों का व्यायाम हो जाता है। इससे शरीर व दिमाग नव ऊर्जा व ताजगी से भर जाता है। हाल ही में हुए एक शोध ने इसके महत्त्व को और बढ़ा दिया है। वे मानते हैं कि यदि 15 मिनट से आधा घंटे तक दैनिक चहलकदमी करें तो ऐसा करने वाला लंबी आयु पाता है। बीमारी उसके पास नहीं फटकती और न किसी बीमारी का डर उसे सताता है।
रात में प्रसव बच्चे को खतरा (Health Tips)
प्रसव तो 24 घंटे में कभी भी हो सकता सकता है किंतु रात के समय एवं छुट्टियों के दिनों में स्थिति विषम होती है। इस दौरान जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा रहता है। वास्तव में ऐसे समय में डाॅक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की कमी रहती है या वे छुट्टी की मानसिकता में रहते हैं।
प्रसव के दौरान की जटिलता एवं हड़बड़ी में बहुत कुछ गड़बड़ा जाता है। उस दौरान प्रसूता रक्त की कमी, शारीरिक गतिवधि में उतार चढ़ाव से जूझती है जबकि बच्चा प्रसव लेकर आक्सीजन की कमी से जूझता है जो उसके जीवन के लिए सबसे बड़ी अपरिहार्यता है, अतएव इस दौरान की आपाधापी में कुछ भी खतरनाक हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। सर्वे में यह पाया गया कि इस अवधि में ही जच्चा बच्चा की सर्वाधिक मौतें हुई हैं। यह तो सर्वे के परिणाम की बात है पर ऐसा ही हो, यह जरूरी कदापि नहीं है।

ज्यादा कैल्शियम से दिल को खतरा (Health Tips For Heart)
कैल्शियम शरीर के लिए आवश्यक तत्व है। यह विटामिन डी के साथ मिलकर दांत एवं हड्डियों को मजबूत बनाता है। यह शरीर की मांसपेशियों को भी सबल बनाता है। यह कुछ मात्रा में हृदय के लिए जरूरी है किंतु जब शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है या हम अतिरिक्त रूप से बाहरी कैल्शियम पृथक लेने लगते है, तब यह दिल के लिए खतरनाक भी हो जाता है।
कैल्शियम की अतिरिक्त खुराक से उसकी अधिकता के चलते हृदय में कड़ापन आ जाता है जो उसके स्वाभाविक कार्य को कठिन बना देता है। जरूरत से ज्यादा कैल्शियम की बाहरी खुराक लेने पर दिल का दौरा भी पड़ सकता है। रक्त में भी प्रवाह के साथ इसकी मात्रा बढ़ जाती है। रक्त परिसंचरण तंत्रा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। धमनियां कठोर होने लगती हैं और दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है।
सिर्फ दौड़ने से ही नहीं घटता वजन व मोटापा
भोर में बहुत से लोग सड़कों एवं उद्यानों में दौड़ लगाते दिख जाते हैं। वे ऐसा कर अपना वजन एवं मोटापा घटाना चाहते हैं जबकि ऐसा करने मात्रा से वजन या मोटापा कम नहीं होता। इसके साथ ही भोजन का नियोजन करना जरूरी होता है। भोजन का पर्याप्त व उपयुक्त पौष्टिक होना जरूरी है।
दौड़ने व ज्यादा जागिंग से शरीर उसका अभ्यस्त हो जाता है एवं घुटनों व जोड़ों पर अधिक भार पड़ता है जिससे वे ज्यादा घिसते हैं एवं उनमें दर्द होने लगता है। वजन व मोटापा घटाने के लिए अपने दैनिक जरूरत के आहार को 4 भागों में बांटना चाहिए। एकबारगी कभी ज्यादा नहीं खाना चाहिए। पानी, सलाद सब्जी की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए एवं मीठी व तैलीय चीजें अत्यंत कम लेनी चाहिएं। तब कहीं वजन व मोटापा कम होता है।
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मोटापा के लिए वंशानुगत गुण जिम्मेदार (Health Tips For Obesity )
एक आम धारणा है कि अधिक खाने से, वसायुक्त भोजन से व अधिक मीठा खाने से लोग मोटापे के शिकार होते हैं पर ऐसा कदापि नहीं होता। मोटापे के लिए वंशानुगत गुण सूत्रा ज्यादा दोषी हैं। जिनके परिजन मोटे हैं, वे खानपान बढ़ाने पर जल्द ही मोटापे के शिकार हो जाते हैं जबकि दुबले परिवार या इकहरी कद काठी वाले परिवार के व्यक्ति अधिक खाने पर भी मोटापे के शिकार कम होंगे।
इस नए शोध से यह स्पष्टतः सिद्ध हुआ है कि वजन व मोटापा बढ़ाने के पीछे पारिवारिक गुण सूत्र की भूमिका है। वैसे अधिक भोजन से मोटापा बढ़े या न बढ़े, यह शरीर के लिए न सही, स्वास्थ्य के लिए जरूर नुकसानदेह है। अधिक भोजन से रक्तचाप, पेट की खराबी, मधुमेह या कोलेस्ट्राल जैसी बीमारी जरूर हो सकती है। अतएव संतुलित भोजन लें और स्वस्थ और सुखी रहें।
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