भीड़तंत्र में फाइव ट्रिलियन इकनॉमी सपना या हकीकत

दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट*
*स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार*
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर समस्त मोदी सरकार का मंत्रीमंडल देश को आने वाले पांच वर्षों में “5 लाख करोड़ डॉलर” की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं। जिस प्रकार से बजट भाषण देते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बार कहा कि देश को अगले पांच वर्ष में “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” की अर्थव्यवस्था बनाना मोदी सरकार का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। यह सभी देशवासियों और देश की अर्थव्यवस्था के उज्जवल भविष्य के लिए एक बहुत अच्छा संदेश है। इसके ठीक अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भी “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” लक्ष्य को अगले पांच वर्ष में हासिल करने के उद्देश्य के बारे में सभी को अवगत कराया था। लेकिन विचारणीय बात यह है कि इस तरह का लक्ष्य देश में अच्छे शांतिपूर्ण अमनचैन युक्त वातावरण में ही संभव है, तब ही सुचारू रूप से देश के विकास रथ का पहिया चल सकता है। उस हालात में ही मोदी सरकार का यह सपना पूरा हो सकता है, मोदी चाहते है जिस तरह से अमेरिका, चीन आदि कई देश काफी कम समय में इस लक्ष्य को हासिल कर चुके हैं, ठीक उसी प्रकार से भारत भी इस “फाइव ट्रिलियन” के लक्ष्य को बहुत कम समय में हासिल कर ले। आजकल प्रधानमंत्री मोदी ऐसे नये भारत बनाने की बात कर रहे हैं जिसमें बहुत तेजी से आर्थिक ग्रोथ हो जो देश के लिए बहुत अच्छी बात है। लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उधोगों व उधोगपतियों को देश में अनुकूल वातावरण देने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी केंद्र व प्रदेश सरकारों की है। इस मसले को लेकर वाराणसी में प्रधानमंत्री जी ने तो यहाँ तक कह दिया कि जो लोग भारतीय अर्थव्यवस्था को “फाइव ट्रिलियन डॉलर” की होने पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, वे निराशावादी हैं। लेकिन हम सभी को यह भी समझना चाहिए कि हमारे देश में लोकत्रांतिक व्यवस्था लागू है और लोकतंत्र में हर व्यक्ति अपनी बात, विचार रखने और सवाल करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है, वैसे भी किसी व्यक्ति व व्यवस्था पर सवाल उठाने का यह मतलब नहीं होता है कि वह ठीक नहीं है, सरकार को समझना होगा कि सवाल के बाद ही समय से समस्या का निदान व उचित समाधान निकालता है, जिसके बाद अच्छे परिणाम देकर सभी लोगों को संतुष्ट किया जाता है।
आजकल देश के हालातों के चलते अर्थव्यवस्था के जानकार “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी” के लक्ष्य के बारे में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलूओं को उठा रहे हैं। जिन पर विचार करके भविष्य में केंद्र की मोदी सरकार को इस लक्ष्य पर काम करने में आसानी होगी। अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत पिछले कुछ दशकों से जिस तेजी के साथ आर्थिक तरक्की कर रहा है उसके चलते यह लक्ष्य जल्द हासिल किया जाना संभव है। लेकिन उसके लिए मोदी सरकार को कारगर आर्थिक रणनीति व देश के माहौल को उधोगों व उधोगपतियों के काम करने के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित व सरल बनाना होगा। आज सरकार को देश के माहौल को भीड़तंत्र से मुक्त करके और अधिक सुरक्षित करके सकारात्मक ढंग से सभी के लिए काम करने के योग्य बनाना होगा, जिसमें सभी लोग जाति-धर्म से उपर उठकर नियम, कायदे, और कानून का सम्मान करते हो। इसके लिए सरकार को सख्ती से देश में भीडतंत्र के माहौल को पूर्ण रूप से खत्म करना होगा और देश में जाति-धर्म से उपर उठकर नियम, कायदे, कानून और संविधान का सम्मान करने वाला राम राज्य स्थापित करना होगा, तब ही यह लक्ष्य तय समय पर हासिल किया जा सकता है। क्योंकि जब भीडतंत्र पर अंकुश लेगा तो देश में अपना धन लगाने वाले बिना अपनी व अपने जानमाल की सुरक्षा की चिंता किये बिना, देश की तरक्की के लिए 24×7 घंटे काम करेंगे और उसके चलते ही भारत विश्व में आर्थिक विकास के नये आयाम स्थापित करेगा। हमको व हमारी सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि भीड़तंत्र के इस माहौल में “फाइव ट्रिलियन इकनॉमी” के सपने को हकीकत में बदलना बहुत कठिन हैं। इस पर तत्काल सख्ती से रोक लगाना आवश्यक है। तब ही देश वर्ष 2024-2025 तक “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” के क्लब में शामिल हो सकता है। मेरा मानना है कि हमारे देश के लोग बहुत परिश्रमी है उनमें इतनी शक्ति व दिमाग है कि वो देश को जल्द ही “फाइव ट्रिलियन डॉलर” की अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है, लेकिन आज उसके रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन हम स्वयं ही हैं हमारा भीडतंत्र वाला गलत व्यवहार है क्योंकि आज जिधर देखों लोगों में कानून तोड़ना फैशन बनता जा रहा है, जो देशहित व समाजहित के लिए ठीक नहीं है आज के हालातों पर मैं कहना चाहता हूँ कि
“वतन को खून पसीने से सींच कर रोशन किया है सबने,
इसको अपने स्वार्थ के लिए ऐसे ना उजाड़ों यारों।।”
आजकल कुछ लोगों में जिस तेजी के साथ हर बात का फैसला खुद करने कि भीडतंत्र वाली आदत बनती जा रही है। जहाँ हर बात का फैसला उन्मादी भीड़ सड़क पर नियम, कायदे व कानूनों की धज्जियां उड़ाकर लोगों के जानमाल का भारी नुकसान करके करती है, वह देशहित में ठीक नहीं है। जिस तरह से जल्द से जल्द प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था को “फाइव ट्रिलियन डॉलर” की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते है उसको हासिल करने के लिए सरकार को तत्काल देश में व्याप्त भीडतंत्र के राज पर अंकुश लगाकर बहुत ही सख्ती से कानून का राज स्थापित करना होगा। सरकार को समझना होगा कि पिछले कुछ दशकों से अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में एक नये आधुनिक विकासशील भारत का बहुत ही तेजी से निर्माण हुआ है, उसी तेजी से भारत को अब विकसित बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मोदी सरकार को तेजी से कदम उठाने होंगे। जिस तरह से मोदी सरकार के कार्यकाल में सरकार के द्वारा बार-बार यह संकेत दिया जाता रहा है कि हम बहुत तेजी से भारत को प्रगति के पथ पर आगे ले जा रहे हैं और जल्द ही हम “फाइव ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी” बन जायेंगे। यह बात दर्शाती है कि हम देश ही नहीं बहुत जल्द आर्थिक महाशक्ति बनकर के दुनिया का नेतृत्व करने की पात्रता प्राप्त करने वाले हैं, जब से नरसिम्हा राव सरकार ने देश के दरवाजे दुनिया के लिए खोले है तब से दुनिया का बड़े से बड़ा देश भी हमसे व्यापार करने को उत्सुक हैं, पिछले कुछ दशकों में पिछली व मौजूदा सभी सरकारों के सार्थक प्रयासों से दिन-प्रतिदिन जिस तरह से देश के महानगरों की बढ़ती रौनक, गांवों व किसानों का होता विकास, स्मार्ट सिटी का निर्माण, कस्बों, बाजारों का विस्तार बहुत तेज गति से हो रहा है वह स्वागतयोग्य है। उसी कारगर प्रयास के चलते आज भारत विश्व समुदाय के सामने बहुत ही सशक्त आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है, ये सब घटनाएं एवं संकेत देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत शुभ हैं। जिस प्रकार से आज हमारा भारतीय समाज आधुनिकता के दौर की इन रोशनियों के बीच देश में व्याप्त घनघोर अंधेरों का बहुत ही तेजी से सफाया करके आगे बढ़ रहा है वह अर्थव्यवस्था व देश के लिए शुभ संकेत है, और उससे भारत जल्द ही विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो जायेगा।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जिस तरह से देश में पिछले कुछ वर्षों में एक अलग तरह के तथाकथित राष्ट्रवाद वाले भीडतंत्र की लहर चल रही है वह देश के आर्थिक विकास के लिए ठीक नहीं है। आज देश में जिस तेजी के साथ कभी जाति के नाम पर व कभी धर्म के नाम पर उन्मादी भीड़ के भीडतंत्र ने पैर पसारे है, इस तरह की स्थिति हमारे देश के लिए सही नहीं हैं। देश के नीतिनिर्माताओं के लिए यह हालात बहुत चिंता का विषय है, उनको इसका तत्काल समाधान निकालना चाहिए। अगर समय रहते भीडतंत्र पर पूर्ण रूप से अंकुश नहीं लगाया तो हम सभी देशवासियों को इसका बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा, क्योंकि भीड़ देश के कुछ गद्दार लोगों के लिए अतिवादी एजेंडे की भांति रही है, जिसका इस्तेमाल ये लोग अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए जरूरत पड़ने पर करते है। भीड़ उस आंधी के समान होती है जिस में एक पल में सब कुछ तबाह हो जाता है और जब ये आंधी शांत होती है तो हर तरफ तबाही के गहरे जख्म छोड़ जाती है जिनको भरने में बहुत लम्बा समय लगता है। लोकतंत्र पर जब भीड़तंत्र हावी होने लगे, तो उसके दुष्परिणाम दिखने में देर नहीं लगती है देश में हर तरफ अराजकता का माहौल बन जाता है कोई भी अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं करता है। तो इस तरह के माहौल में विकास संभव नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में भीड़तंत्र ने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है, जो सोचनीय है। लेकिन विगत कुछ वर्षो में इन घटनाओं में कुछ ज्यादा ही इजाफा हुआ है जिसकी तह तक केंद्र व राज्य सरकारों को जाना चाहिए। एक सच्चाई यह भी है कि भीड़ पर तुरंत पार-पाना ना तो कानून के बस की बात है और न ही सरकारी सुरक्षा तंत्र के बस की बात है, बेकाबू भीड़ पर एक दम किसी सरकारी व गैरसरकारी तंत्र का जोर नहीं चलता है। देश में कई बार देखने को मिला है कि पुलिस व सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ही हजारों की संख्या में एकत्र लोगों की भीड़ ने किसी भयंकर कृत्य को बेखौफ अंजाम दे दिया है और अपनी मजबूरी के चलते इन घटना को सुरक्षाकर्मी सिर्फ तमाशबीन बन हाथ पर हाथ रखे देखते रह गये थे। फिर भी सुप्रीम कोर्ट का इस भीडतंत्र की गम्भीर समस्या पर चिंता व्यक्त करना सरकार के लिए भविष्य में भीड़तंत्र पर काबू पाने का कारगर हथियार साबित हो सकता है। जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता, लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती, अब राज्य व केंद्र सरकारों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह आपस में तालमेल करके देश में कानून व्यवस्था बनाए रखें और भीड़तंत्र के दोषियों पर सख्त कार्रवाई को लेकर किसी प्रकार का जाति-धर्म के नाम पर भेदभाव का नामोनिशान न रखें। मैं भीडतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से कहना चाहता हूँ कि
“इस चमन को अपने हाथों से यूँ ना उजाड़ो दोस्तों,
भीड़तंत्र लागू करके नया कानून ना बनाओं दोस्तों।।”
आज जब हम सुबह उठते है तो समाचार पत्र व न्यूज चैनल हमको सबसे पहले खबर सुनाते है कि आपसी विवाद को  उन्मादी भीड़ ने धार्मिक रंग देकर दिल्ली में मंदिर में तोडफ़ोड़ कर दी है, जय श्री राम का नारा ना लगाने पर उन्मादी भीड़ ने युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी है, गौरक्षा के लिए उन्मादी भीड़ ने कानून हाथ में लेकर गाय के तस्करों की पीट कर हत्या कर दी, आरक्षण ना मिलने पर उन्मादी भीड़ ने राजस्थान में जमकर सार्वजनिक व निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया है व भीड़ हफ्तों तक सड़कों व रेल की पटरियों पर कब्जा जमाकर बैठ गयी, आरक्षण की मांग को लेकर के हरियाणा में उन्मादी भीड़ ने अपने हाथों से ही अपने देश को जमकर आग लगायी गयी, आरक्षण के लिए भीड़ ने गुजरात में जमकर तोडफ़ोड़ की, पिछले कुछ वर्षों से देश में आयेदिन उन्मादी भीड़ सड़क बवाल मचाती है, आज देश में हर तरफ जाति व धर्मों के ठेकेदारों के चलते अलग-अलग जाति व धर्म के चंद लोग बहुत खतरें में हैं ये ठेकेदार समय-समय पर भीड़ को कानून हाथ में लेने के लिए उकसाते है और भोलीभाली जनता को मूर्ख बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते है, इन तथाकथित ठेकेदारों को ना तो अपने समाज की चिंता है ना ही देश की जरा भी चिंता नहीं है। आज सरकार को सोचना होगा कि आखिर पिछले कुछ वर्षों में ऐसा क्या हो गया जो देश में इस तरह का भीडतंत्र का माहौल बन गया इसके लिए जिम्मेदार लोगों को चिंहित करके उनको कठोर सजा देनी होगी। वैसे इस माहौल के लिए कही ना कही शासन-प्रशासन में बैठे लोगों का ढुलमुल रवैया भी जिम्मेदार है और देश की न्याय प्रणाली से बहुत ही देर से मिलने वाला न्याय जिम्मेदार है।
आज हमारे प्यारे देश में चंद भीड़तंत्र वाले लोगों की वजह से कानून व्यवस्था की हालत बेहद खस्ता हो गयी है। जिसके चलते मोदी सरकार के “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी” के सपने पर संकट के बादल मंडरा रहे है।
आज भीडतंत्र के चलते हमारे समाज की संवेदना इस कदर मर चुकी है कि कभी गैर जातिय व धर्म के प्रेमप्रसंग के नाम पर, कभी बाईक चोरी के नाम पर, कभी गोमांस के नाम पर, कभी गोरक्षा के नाम पर, कभी बच्चा चोर के नाम पर, कभी सड़क दुर्घटना के नाम पर आयेदिन भीड़तंत्र के द्वारा सड़क पर लोगों की पिटाई व हत्या होने लगी है। लोगों के मन से कानून का सम्मान व भय तेजी से समाप्त होता जा रहा है। हाल के वर्षों में केंद्र व राज्य सरकारें इस पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है। देश व प्रदेशों की सरकार का प्रमुख कर्तव्य है कि वह आम-जनमानस को सुरक्षा मुहैया कराए और लोगों में नियम, कायदे, व कानून के प्रति विश्वास को बरकरार रखे। जिससे देश में सबको समय से समान न्याय और तरक्की के समान अवसर उपलब्ध हो सकें। देश में कब तक नकारात्मक शीर्षकों और विचलित कर देने वाली खबरों से हमारा रोजाना सामना होता रहेगा? कभी उत्तर प्रदेश, कभी मध्यप्रदेश, कभी राजस्थान, कभी महाराष्ट्र तो कभी छत्तीसगढ़, कभी झारखंड भारत का शायद ही कोई ऐसा राज्य होगा, जो पिछले कुछ वर्षों से भीड़ की हिंसा से ग्रस्त ना हो। अब स्थिति यह हो गयी है कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करते हुए कहना पड़ रहा है कि “लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कानून नहीं बना सकता” यही लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की एक अति महत्वपूर्ण कारगर व्यवस्था है। आज मोदी सरकार को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करे और देश व समाज में अमनचैन, शांति एवं भाईचारे की स्थापना करें ताकि सबको विकास के समान अवसर उपलब्ध हो सकें। अगर सरकार ने भीड़तंत्र पर बहुत ही जल्द अंकुश नहीं लगाया तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हावी हो जाएगा और जब लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी हो जाएगा तो फिर समाज में हर तरफ अराजकता का माहौल कायम हो जाएगा। इसलिए मोदी सरकार को चाहिए कि व राज्य की सरकारों से तालमेल करके जल्द से जल्द देश में भीड़तंत्र भरे माहौल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करके देश के विकास में बने इस भीड़तंत्र नामक अवरोधक को हटाये।
किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनतंत्र की सफलता के लिए देश में उचित करिश्माई जनप्रिय नेतृत्व का होना परम आवश्यक है। हमारे देश में इस समय उच्च स्तरीय नेतृत्व तो कमाल का है परन्तु स्थानीय स्तर पर इसकी कमी है। हमारे देश में प्राय: देखा जाता है कि कुछ उच्च स्तरीय व स्थानीय स्तर के नेता अपने निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए जनता में जातिवाद, साम्प्रदायिकता तथा क्षेत्रवाद आदि अवांछनीय भावनाओं को भड़काते रहते हैं। इससे भीड़तंत्र का जन्म होता और लोगों के जानमाल की सुरक्षा हर समय खतरे में पड़ी रहती है। भीड़तंत्र पर प्रतिबंध का व्यापक असर तभी देखने को मिलेगा जब ऐसी अराजकता के खिलाफ आम-जनमानस एकजुट हो, और देश का सरकारी तंत्र ईमानदारी से बिना किसी भेदभाव से निष्पक्ष रूप से बेहद सख्ती से दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें। भीड़तंत्र पर मात्र एक सख्त कानून बना देने मात्र से ही इस ज्वंलत समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। देश में अब भीड़तंत्र से उत्पन्न गम्भीर समस्या को राकने के लिए सरकार के साथ सभी लोगों को भी जिम्मेदार व जागरूक नागरिक बनना जरूरी है। वैसे हमारे देश की बहुसंख्यक आबादी हमेशा अमनचैन के साथ प्यार-मोहब्बत से मिल-जुलकर, शांति से रहने में ही भरोसा रखती है और देश में भीड़तंत्र के अधिकतर मामलों में भीड़ अपना उग्र रूप तभी धारण करती है जब उन्हें पीछे से कोई उकसाता है। कुछ राजनैतिक लोग अपने लाभ के लिए भीड़ का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब समय आ गया है जब हम सभी देशवासियों को ऐसे देशद्रोहियों के बहकावे में आने से बचना होगा। तब ही हम देश को “फाइव ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी” के सपने को हकीकत में बदल सकते है।